हसायन के गांव नगरिया पट्टी देवरी की राजवती देवी के पुत्र हरी सिंह ने भगदड़ मामले की आपबीती सुनाई। उसने कहा कि पहले पत्नी, अब मां चली गई, तीन बेटियों को कौन संभालेगा।
हाथरस के हसायन ब्लॉक के गांव नगरिया पट्टी देवरी से सत्संग में गई राजवती देवी अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके पुत्र हरी सिंह अपनी तीन बेटियों के साथ सत्संग में गए थे, लेकिन बेटियों को भूख लगने के कारण भगदड़ मचने से पहले ही वह बाहर आ गए। कुछ माह पहले ही अपनी पत्नी को खो चुके हरी सिंह को नहीं मालूम था कि अब वह अपनी मां से कभी नहीं मिल पाएंगे।
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हरी सिंह ने बताया कि उनका परिवार साकार नारायण हरि से लंबे समय से जुड़ा था। माता-पिता उस समय से सत्संग में जा रहे हैं, जब पटियाली में छोटी कुटिया में बाबा 50 या 100 लोगों के बीच सत्संग करते थे। मां राजवती काफी समय से बीमार थीं, इसलिए बाबा की सेवा में सत्संग में चली गईं।
बाद में हरी सिंह भी अपने परिवार को लेकर सत्संग में पहुंच गए, लेकिन सत्संग खत्म होने से पहले ही बेटियों को भूख लगी तो वह वहां से बाहर आ गए। बाद में पता चला कि भगदड़ मच गई है। अस्पताल पहुंचे तो वहां मां का शव मिला। हरी सिंह कहते हैं कि अब वह अपनी एक साल, ढाई साल व पांच साल की बेटी को किसके सहारे पालेंगे।
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मां के साथ गई ममेरी बहन व मासूम की भी मौत
हरी सिंह बताते हैं कि उनकी मां के साथ सिकंदराराऊ के गांव दोकली की निवासी उनकी ममेरी बहन धारा अपनी एक साल की बेटी के साथ सत्संग में गई थीं। उनकी भी मौके पर ही मौत हो गई। बताया कि बहन के ससुराली उन्हें वहां से ले गए थे, लेकिन अगले दिन बागला अस्पताल में उनका पोस्टमार्टम हुआ है।
पीछे से आई भीड़ तो बहन से छूट गया अम्मा का हाथ...
पुरदिलनगर के गांव नगला बिहारी से इंद्रवती देवी अपनी नातिन को लेकर गांव के कुछ लोगों के साथ सत्संग में गई थीं। नाती अजीत बताते हैं कि उनकी बहन वंदना को भी इस घटना में चोटे आईं, लेकिन अम्मा की मौत से वह अपने दर्द को भूल गई है। अजीत बताते हैं कि सत्संग के दौरान अम्मा व बहन महिलाओं की भीड़ में थीं।
सत्संग खत्म होने के बाद अचानक पीछे से भीड़ ने धक्का मारा और सब गिरते चले गए। बहन वंदना ने अम्मा का हाथ पकड़ा हुआ था, लेकिन धक्के के बाद हाथ छूट गया। वंदना भी गिर गई। जैसे-तैसे उठी तो अम्मा कहीं नहीं मिलीं। काफी देर बाद सत्संग में गांव से गई बुआ के परिवार को फोन किया तो सब अस्पताल पहुंचे। वहां अम्मा का शव मिला।
मना करने पर भी गए थे पांच लोग, सिर्फ तीन लौटे
मैंने पत्नी शीला से मना किया था कि क्या करोगी सत्संग में जाकर, लेकिन बोली की पहली बार बाबा पास में सत्संग कर रहे हैं तो चली जाती हूं, दूर तो कभी गई नहीं। पता नहीं था कि शीला का यह पहला सत्संग आखिरी होगा। पत्नी की मौत पर दुखी हर प्रसाद बताते हैं कि गांव से पांच लोग गए थे, सिर्फ तीन ही लौटे।