न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
एक दिसंबर के दिन पूरी दुनिया में ‘विश्व एड्स दिवस’ मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य कारण इसके प्रति जागरूकता फैलाना है, जिससे इस पर नियंत्रण पा सके। एचआईवी संक्रमण एक खतरनाक बीमारी है, जिसका खात्मा अभी पूरी तरह से असंभव है। इसके फैलने का मुख्य कारण एचआईवी पॉजिटिव मां से बच्चे का होना भी है। नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (नाको) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2017 में देश में 21.40 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित थे। इस दौरान करीब 69 हजार लोगों की मौत इसके कारण हुई और 22,675 गर्भवती महिलाओं को एंटीरोट्रो वायरल थैरेपी की जरूरत पड़ी।
गर्भवती महिला के बच्चे को एचआईवी संक्रमण होने की संभावना 80-85 फीसदी तक होती है। गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान रखना चाहिए और स्पेशल ट्रीटमेंट करवाना चाहिए, जो हर अस्पताल में उपलब्ध होता है। एचआईवी पीड़ित गर्भवती महिला को पहले और तीसरे महीने में क्लीनिकल परीक्षण कराना चाहिए। एचआईवी और अन्य इन्फेक्शन से जुड़े टेस्ट कराते रहने चाहिए।
गर्भावस्था के दौरान हर तिमाही में एचआईवी टेस्ट कराए जाएं। एचआईवी पीड़ित गर्भवती महिला को डिलीवरी के समय एक हफ्ते पहले एडमिट करके एचआई का इलाज शुरू करते है। इससे पहले नहीं कर सकते क्योंकि बच्चे की जान को खतरा होता है। दरअसल, गर्भ में पल रहा बच्चा अपने पोषण के लिए मां पर ही निर्भर होता है। ऐसे में उसके संक्रमित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। महिलाओं में एचआईवी वायरस है तो इससे उन्हें अन्य कई बीमारियां भी हो सकती हैं। एचआईवी पीड़ित महिलाओं में कैंसर, ब्लड कैंसर, निमोनिया और फंगल निमोनिया भी देखा गया है।
पॉजिटिव केस
वर्ष केस
2015-16 24
2016-17 25
2017-18 49
2018-19 75
अप्रैल 2019 से अब तक करीब 50
दो प्रकार का होता है एचआईवी
एचआईवी-1 : यह प्रकार दुनिया भर में पाया जाता है और सबसे आम है।
एचआईवी-2 : ज्यादातर पश्चिम अफ्रीका, एशिया और यूरोप में पाया जाता है।
एचआईवी कैसे फैलता है?
एचआईवी मुख्य रूप से निम्नलिखित शरीर के तरल पदार्थों (बॉडी फ्लुइड्स) के संपर्क से फैलता है
रक्त (मासिक धर्म/ पीरियड ब्लड सहित)
वीर्य (सीमेन ) और अन्य पुरुष यौन पदार्थ (सेक्सुअल सिक्रेशन)
योनि तरल पदार्थ (वजाइनल सिक्रेशन)
एक-दो माह में नजर आते हैं लक्षण
एचआईवी के लक्षण आमतौर पर वायरस के शरीर में पहुंचने के एक से दो महीने में नजर आने लगते हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में इन्हें पहचानना मुश्किल होता है, क्योंकि ये लक्षण आम वायरल फीवर या खांसी-सर्दी से काफी मिलते-जुलते हैं। अगर आपको लगता है कि असुरक्षित सेक्स या किसी एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति के शरीर के खून, सीमन आदि से आप संपर्क में आए हैं तो इन लक्षणों को हल्के में न लें।
ये हैं प्रमुख लक्षण
बुखार आना, अचानक सिरहन होना या ठंड लगना, लिम्फ नोड में सूजन, शरीर में दर्द या टीस उठना, स्किन रैश, सिरदर्द बने रहना, गला खराब होना, उल्टी जैसा होना या बेचैनी बने रहना, पेट खराब रहना, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, रात में सोते समय ज्यादा पसीना आना, वजन कम होना, निमोनिया होना, बार-बार वजाइना या पीनस में इंफेक्शन होना।