न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
लॉकडाउन में सीमा सील होने के बावजूद बुधवार की देर रात ब्लॉक हाथरस के गांव ककोड़ी में मुंबई से सात मजदूर पहुंच गए। इन लोगों के गांव में पहुंचते ही ग्राम प्रधान ने इस बारे में प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। मुंबई से आने वाले सभी लोगों को प्रेम रघु पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट में बने क्वारंटीन सेंटर में पहुंचा दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि यह सभी मजदूर एक केलों से लदे ट्रक में बैठकर हाथरस तक पहुंचे।
कोरोना वायरस को लेकर शासन के निर्देश पर प्रदेशों के साथ सभी जिलों की सीमाएं सील कर दी गई हैं। सीमा सील के बाद आने वाले लोगों को क्वारंटीन सेंटरों में रखा गया है। यहां तक कि जिले के क्वारंटीन सेंटरों में रहने वाले ज्यादातर लोगों की 14 दिन की अवधि भी पूरी हो चुकी है। इस कारण इन लोगों का स्वास्थ्य चेकअप कर इन्हें घर भेजा जा रहा है।
बुधवार की देर रात गांव ककोड़ी में अचानक सात लोग मुंबई से पहुंचे तो ग्राम प्रधान ने इन्हें गांव में नहीं घुसने दिया। ग्राम प्रधान ककोड़ी ने देर रात स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी कि गांव में एक साथ सात मजदूर मुंबई से आ गए हैं। इन सभी का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला व स्वास्थ्य विभाग की टीम हरकत में आ गई। सभी को स्वास्थ्य चेकअप के लिए बागला जिला चिकित्सालय लाया गया। जहां सभी का स्वास्थ्य चेकअप किया गया।
ज्ञात हुआ कि यह सभी लोग एक केलों से भरे ट्रक में बैठकर मुंबई से हाथरस तक का सफर तय कर पहुंचे हैं। इस बात को सुनकर सभी हैरान रह गए। फिलहाल इन सभी को स्वास्थ्य चेकअप के बाद क्वारंटीन सेंटर में रखवा दिया गया है। डीपीआरओ बनवारी सिंह ने बताया कि सात लोग मुंबई से आने पर स्वास्थ्य चेकअप के बाद क्वारंटीन सेंटर में भिजवा दिया गया है।
32 लोगों को क्वारंटीन सेंटरों से भेजा घर
हाथरस। जिले के क्वारंटीन सेंटरों में रहने वाले लोगों को 14 दिन पूरे होने के बाद घर भेजे जाने का सिलसिला चल रहा है। बृहस्पतिवार को पंचायतराज विभाग के क्वारंटीन सेंटरों से 32 लोगों को घर भेजा गया। इन सभी को चिकित्सकों ने होम क्वारंटीन किए जाने के निर्देश दिए हैं। इन सभी की सतत: मॉनीटरिंग की जाएगी। पंचायतराज विभाग की ओर से अब तक 171 लोगों में से 157 लोगों को घर भेज दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि अपने ही प्रदेश के जिलों के रहने वाले लोग अभी भी क्वारंटीन सेंटरों में रह रहे हैं, जबकि इन लोगों की 14 दिन की अवधि भी पूरी हो चुकी है।