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हाथरस: भाभी की हत्या करने वाले देवर को आजीवन कारावास की सजा

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भाभी की हत्या करने वाले देवर को आजीवन कारावास की सजा
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एडीजे द्वितीय न्यायालय ने सुनाया फैसला, अर्थदंड भी देना होगा
एडीजे प्रथम ने भी गैर इरादतन हत्या के तीन दोषियों को सुनाई दस-दस साल कैद की सजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। दो अलग-अलग मामलों में न्यायालय ने सजा सुनाई है। एडीजे द्वितीय न्यायालय ने भाभी के हत्यारे देवर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इधर, गैर इरादतन हत्या के तीन दोषियों को एडीजे प्रथम आशीष जैन ने दस दस साल कैद की सजा सुनाई है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या दो ने हत्या के एक मामले में सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार हेमवती पत्नी भूप सिंह निवासी धनीपुर थाना गंाधी पार्क अलीगढ़ ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी बेटी प्रीति उम्र 22 वर्ष की शादी कपिल पुत्र पीतंबर निवासी नगला टीका थाना कोतवाली हाथरस के साथ की थी। कपिल का छोटा भाई योगेश उसकी बेटी पर खराब नीयत रखता था।
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इसकी शिकायत प्रीति की मां ने कपिल व कपिल की मां भूदेवी से की थी तो भूदेवी ने इस पर कहा था कि बहू योगेश का झूठा नाम लगा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक 13 अक्तूबर 2014 को शाम चार बजे योगेश ने प्रीति को अकेला पाकर बुरी नीयत से पकड़ लिया। प्रीति ने इसका विरोध किया तो योगेश ने उस पर मिट्टी का तेल डालकर जिंदा जला दिया। आग लगने पर वहां भीड़ एकत्रित हो गई। इस पर योगेश वहां से भाग गया। प्रीति का हाथरस के अलावा आगरा अलीगढ़ में उपचार कराया गया। 9 नवंबर 2014 को प्रीति ने अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया। इस मामले में मुकदमा कायम कर पुलिस ने विवेचना की।
विवेचना के बाद पुलिस ने योगेश के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। दोनों पक्षों ने अपने अपने तर्क प्रस्तुत किए। एडीजे कोर्ट संख्या दो प्रतिभा सक्सेना ने योगेश को धारा 302 में सश्रम आजीवन कारावास व अर्थदंड और धारा 354 में पांच साल की कैद व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) राजपाल सिंह दिसवार ने पैरवी की।
एक अन्य मामले में एडीजे प्रथम सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार सात अगस्त 2009 को शाम चार बजे के लगभग द्रोपा देवी निवासी गंथरी शाहपुर सिकंदराराऊ की भैंस का बच्चा गांव के ही भीष्मपाल की भुस की बुर्जी मेें मुंह मारने लगा तो द्रोपा देवी ने उसे हटा लिया। इसी बात पर भीष्मपाल को गालियां दीं। मौके पर द्रोपा देवी के पति राजेश कुमार व सास सरला देवी भी वहां आ गईं। भीष्मपाल व कुछ अन्य लोगों ने लाठी-डंडे सरिर्या इंटों से प्रहार कर इन्हें मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
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गंभीर हालत में राजेश कुमार को अलीगढ़ में एक अस्पताल में दाखिल कराया गया। जहां उपचार के दौरान राजेश कुमार की मौत हो गई। पुलिस ने सिकंदराराऊ थाने में मुकदमा दर्ज कर विवेचना की। विवेचना अधिकारी ने भीष्मपाल, हरिओम, सावित्री और गुड्डी के विरुद्ध आरोप पत्र धारा 323, 336, 304 के तहत कोर्ट में दाखिल किया। मामले की सुनवाई एडीजे प्रथम न्यायालय में हुई। एडीजे प्रथम आशीष जैन ने भीष्मपाल, हरिओम व गुड्डी को दोषी मानते हुए इन्हें दस दस साल कैद व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर इन्हें अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी हरिओम शर्मा ने पैरवी की।
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