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हाथरस: घोटाले में लिप्त शिक्षा माफियाओं में मची खलबली

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घोटाले में लिप्त शिक्षा माफिया में मची खलबली
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करोड़ों की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति डकार गए थे माफिया, अब सता रहा है गिरफ्तारी का डर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। छात्रवृत्ति घोटाले में दोषी पाए गए जिले के कुछ स्कूलों के प्रबंधक-प्रधानाचार्यों की गिरफ्तारी की मंजूरी शासन द्वारा दिए जाने के बाद बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में लिप्त रहे शिक्षा माफिया में खलबली मच गई है। इन्हें अपनी गिरफ्तारी का डर सता रहा है।
वर्ष 2007 से लेकर 2011 तक जिले में छात्रवृत्ति घोटाला हुआ। इसके बाद भी कई घोटाले हुए। इसमें कई स्कूल-कॉलेजों के प्रबंधकों ने कुछ तत्कालीन अधिकारियों से मिलकर 24.92 करोड़ रुपये का घोटाला किया था। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। कुछ स्कूल-कॉलेज तो धरातल पर ही नहीं थे, फिर भी उन्हें कागजों में छात्रवृत्ति बांट दी गई थी। पूरे मामले की जांच स्थानीय स्तर पर भी की गई थी और फिर मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा कानपुर ने अपने हाथ में ले ली थी।
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इस छात्रवृत्ति घोटाले की गूंज शासन तक पहुंची थी। माफिया ने मिलीभगत कर उस समय जांच के दौरान दस्तावेज भी गायब करा दिए थे। अब शासन ने पांच निजी स्कूलों के प्रबंधक व प्रधानाचार्यों की गिरफ्तारी को आर्थिक अपराध शाखा कानपुर को मंजूरी दे दी है। इसकी जानकारी शाखा के एसपी ने भी दी है। इसमें एक कॉलेज के प्रबंधक युवराज सिंह भी शामिल हैं। इस मंजूरी के बाद यहां पूरे दिन माफिया में खलबली मची रही।
यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि जिले में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के रूप में तैनात रहे वीपी सिंह की गिरफ्तारी भी आर्थिक अपराध शाखा ने की थी। उन पर भी कई घोटाले को अंजाम देने का आरोप है। जब यह घोटाले हुए, तब उन पर समाज कल्याण विभाग का भी जिले में अतिरिक्त कार्यभार था। उनकी गिरफ्तारी के बाद डीएम ने स्थानीय स्तर से सभी पत्रावलियां भी तलब की थीं। ऐसे में अब यह माना जा रहा है कि जल्द ही घोटाले में लिप्त रहे माफिया की गिरफ्तारी होगी।
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नियम विरुद्ध बांट दी थी शुल्क प्रतिपूर्ति
हाथरस। इतना ही नहीं वीपी सिंह के कार्यकाल में जिले की 25 शिक्षण संस्थाओं को नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति बांट दी थी। इसमें कई नामचीन संस्थाएं भी शामिल हैं। इसकी विवेचना भी आर्थिक अपराध शाखा ही कर रही है।
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