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हाथरस : कोरोना की मार से फिर मुरझाया ‘गुलाब’

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खेतों में खड़ी गुलाब की फसल। - फोटो : HASAYAN
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मुकुल भारद्वाज, हसायन।
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वैश्विक महामारी कोरोना के दौर में गुलाब पैदा करने वाले किसान भी मुसीबत में घिरे हुए हैं। संक्रमण से पहले जो गुलाब सात से आठ हजार रुपये प्रति मन (40 किग्रा) बिक रहा था, वर्तमान में उसके दाम घटकर तीन हजार रुपये प्रति मन ही रह गए हैं। पिछले साल भी यह गुलाब का फूल चार से पांच हजार रुपये प्रति मन ही बिका था। किसान इस हालात के लिए व्यापारियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
क्षेत्र में वर्ष में दो बार गुलाब के फूल की पैदावार होती है। पहला सीजन आधे फाल्गुन मास से लेकर चैत्र नवरात्रि तक चलता है, जबकि दूसरा सीजन बारिश के मौसम में शुरू होता है। वर्तमान में दूर-दराज के शहरों के व्यापारियों द्वारा सीजन को भुनाने के लिए कम रेट निर्धारित कर गुलाब के फूल की खरीदारी की जा रही है।
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वैसे भी किसान वैश्विक महामारी के दौर में परेशानी से गुजर रहा है। किसानों का कहना है कि वर्तमान में एक बीघा में 700 से 800 ग्राम गुलाब के फूल की पैदावार बमुश्किल हो रही है। पैदावार के दौरान निराई, गुड़ाई, खाद, पानी और मजदूरी सहित पांच हजार रुपये प्रति बीघा गुलाब के फूल की लागत बन रही है। कच्चा माल होने के कारण यह फसल ज्यादा समय तक टिक नहीं पाती। बाहरी व्यापारियों द्वारा मनमाने रेट निर्धारित कर गुलाब का फूल खरीदकर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है। संवाद
कोरोना महामारी से पहले तो फूल का रेट सही मिला था मगर जब से कोरोना काल शुरू हुआ है, तब से गुलाब की पैदावार पर आने वाली लागत भी नहीं निकल पा रही। वर्तमान में व्यापारियों द्वारा तीन हजार रुपये प्रति चालीस किलो के हिसाब से फूल की खरीदारी की जा रही है, जिससे किसान का बहुत शोषण हो रहा है।
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-निरंजन सिंह, किसान गांव कटाई
कोरोना काल से पहले वर्ष 2019 में गुलाब का रेट सात से आठ हजार रुपये प्रति मन तक रहा था। वर्ष 2020 में कोरोना काल शुरू होते ही इसके दाम चार से पांच हजार रुपये प्रति मन रह गए मगर अब गुलाब के फूल का रेट व्यापारियों द्वारा तीन हजार रुपये प्रति मन तक निर्धारित किया गया, जिससे लागत भी नहीं निकल रही।
-महेश कुमार, किसान
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