न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
अगले साल होने वाले विस चुनाव की तैयारी में राष्ट्रीय लोकदल भी जोर-शोर से लगा है। रालोद का पूरा जोर सादाबाद विधानसभा सीट पर है। चुनाव में सपा-रालोद का गठबंधन तय माना जा रहा है और ऐसे में जाट बहुल इस सीट से रालोद का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा। वर्ष 2017 रालोद को इस सीट पर बसपा से हार का सामना करना पड़ा था। रालोद अब इस सीट पर फिर अपना कब्जा करना चाहता है।
जिले का चुनावी इतिहास देखें तो हाथरस विधानसभा सीट पर रालोद की स्थिति मजबूत रही है। यह सीट रालोद कभी जीत नहीं पाया और वर्ष 1996 से लेकर वर्ष 2017 तक बसपा का इस सीट पर कब्जा रहा है, लेकिन वर्ष 2002 में रालोद के उम्मीदवार देवस्वरूप शर्मा इस सीट पर दूसरे स्थान पर रहे तो वर्ष 2007 में रालोद से चुनाव लड़े देवेंद्र अग्रवाल ने दूसरा स्थान हासिल किया।
इतना ही नहीं वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में तो भाजपा और रालोद के गठबंधन के तहत रालोद की सारिका सिंह ने लोकसभा का चुनाव भी जीता। रालोद की सबसे ज्यादा मजबूत स्थिति सादाबाद में रहा। वहां 2001 के उपचुनाव में रालोद के रामशरन आर्य ने रालोद से जीत हासिल की। उसके बाद वर्ष 2002 में रालोद से ही प्रताप चौधरी जीते। तदुपरांत वर्ष 2007 में रालोद के डॉ. अनिल चौधरी ने जीत हासिल की। पिछले वर्ष 2017 के चुनाव में भी जब भाजपा की लहर चल रही थी तो इस सीट पर बसपा व रालोद में ही मुख्य मुकाबला हुआ।
रालोद से लड़े डॉ. अनिल चौधरी दूसरे स्थान पर रहे। सिकंदराराऊ सीट से रालोद का आज तक खाता नहीं खुला। अब वर्ष 2022 में सपा और रालोद का गठबंधन तय माना जा रहा है। इसके चलते यह भी तय माना जा रहा है कि सिकंदारराऊ और हाथरस सीट से सपा चुनाव लड़ेगी और सादाबाद से रालोद अपना प्रत्याशी मैदान में उतारेगा। ऐसे में इस सीट को जीतने के लिए रालोद ने पूरा जोर लगा दिया है। हाल में ही रालोद के मुखिया जयंत चौधरी यहां जनसभा भी कर चुके हैं। उसके पहले बहुचर्चित बिटिया प्रकरण में भी वह यहां आए थे। संवाद
पार्टी पूरी मजबूती से विधानसभा चुनाव लड़ेगी। जिसे पार्टी नेतृत्व टिकट देगा, उसे चुनाव लड़ाया जाएगा। पार्टी इसके लिए तैयारी कर रही है।
-प्रदीप चौधरी, गुड्डू, प्रदेश महासचिव रालोद पश्चिमी उत्तर प्रदेश।