न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
चुनावी वर्ष में जिले के लिए लोगों को जर्जर सड़कों से निजात मिल सकती है। तीनों विधानसभा क्षेत्रों में लोक निर्माण विभाग के अफसर खुद जर्जर सड़कों की हकीकत परख रहे हैं। विशेष मरम्मत अभियान के तहत सड़कों का कायाकल्प कराने की तैयारी चल रही है। अब तक दो दर्जन से अधिक सड़कों की फेहरिस्त तैयार हो चुकी है। विभाग के नये अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) खुद क्षेत्र में सड़कों का निरीक्षण कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि कोरोना काल के दौरान जिले की सड़कों को दुरुस्त कराने के लिए शासन से बजट नहीं मिला था। जो बजट था, वह एक ठेकेदार का भुगतान न करने की वजह से खाता कुर्क होने से फंस गया। इस कारण जिले सड़कों की हालत में सुधार नहीं हो सका। अब सरकार ने सितंबर माह से गड्ढा मुक्ति का अभियान चलाने का आदेश दिया है।
जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्रों में काफी सड़कें ऐसी हैं, जोकि गड्ढामुक्त नहीं हो सकतीं। लोनिवि के अफसरों द्वारा इनको सुधरवाने के लिए विशेष मरम्मत अभियान शुरू करने की तैयारी चल रही है। अब तक तीनों विधानसभा क्षेत्रों में करीब 35 सड़कों का अफसरों ने हाल जाना है। बाकी सड़कों का निरीक्षण चल रहा है। जल्द ही विशेष मरम्मत के लिए सड़कों का प्रस्ताव तैयार शासन को भेजा जाएगा।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार निगम का कहना है कि जो सड़कें गढ्ढा मुक्ति से सहीं नहीं हो सकतीं, उनको विशेष मरम्मत के तहत सही करने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक करीब 35 सड़कों का सर्वे किया गया है। बाकी का भी सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद इन सड़कों की मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।
गड्ढा मुक्ति के लिए मिलती है कम धनराशि
हाथरस। भले ही सरकार सड़कों को गड्ढामुक्त कराने के लिए अभियान चलाने की बात कह रही है, लेकिन सड़कों को गड्ढामुक्त कराने के लिए जो धनराशि दी जाती है, वह नाकाफी साबित होती है। खास बात यह है कि 20 से 25 हजार रुपये एक किलोमीटर सड़क को गड्ढा मुक्त कराने के लिए दिए जाते हैं। महंगाई के इस दौर में यह धनराशि इस काम के लिए नाकाफी साबित होती है। यही वजह है कि लोनिवि ने सड़कों के गड्ढों को भरने के लिए विशेष मरम्मत की योजना बनाई है। संवाद