न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
अगले साल प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं और इसके लिए सभी दल जोर-शोर से तैयारी कर रहे हैं। इस चुनाव में इस जिले में अभी तक सबसे ज्यादा सफलता पूर्व मंत्री व सादाबाद विधायक रामवीर उपाध्याय के हाथ लगी है। अभी तक बसपा के टिकट पर जनता उन्हें पांच बार विधानसभा में पहुंचा चुकी है। और वह भी जिले की तीनों सीटों से। इसके अलावा कुं. रामसरन सिंह, कुं. अशरफ अली खां, हरीशंकर माहौर, पं. नेकराम शर्मा भी चार-चार बार विधायक बन चुके हैं।
जिले के चुनावी इतिहास को देखें तो विधानसभा चुनाव में यहां अभी तक सबसे ज्यादा सफलता पूर्व मंत्री व वर्तमान में सादाबाद से विधायक रामवीर उपाध्याय को मिली है। रामवीर उपाध्याय की राजनीति में एंट्री वर्ष 1993 में हुई। उस समय वह निर्दलीय चुनाव लड़े थे और तीसरे नंबर पर आए थे। उसके बाद वर्ष 1996 में जब बसपा में शामिल हुए तो लगातार जीतते चले गए। वर्ष 1996, 2002 और वर्ष 2007 में वह हाथरस सदर सीट से चुनाव जीते। हाथरस सीट जब अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित हो गई तो रामवीर ने बसपा से ही वर्ष 2012 का चुनाव सिकंदराराऊ से लड़ा और वहां से भी वह चुनाव जीत गए। तदुपरांत अपनी रणनीति के तहत वर्ष 2017 का चुनाव उन्होंने बसपा से ही सादाबाद से लड़ा और इस चुनाव में भी उन्होंने विजयश्री हासिल की। इस तरह अभी तक रामवीर पांच बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं और वह भी जिले की तीनों अलग-अलग सीटों से।
बसपा की सरकारों में वह कबीना मंत्री भी रहे हैं। इसके अलावा वर्तमान में सदर विधायक हरीशंकर माहौर भी राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। वह वर्ष 1991, वर्ष 1993 और वर्ष 1996 में लगातार सासनी सीट से भाजपा से विधायक रह चुके हैं। वर्तमान में वह हाथरस सदर सीट से विधायक हैं। इसी तरह कुं. रामसरन सिंह को भी जनता ने चार बार विधानसभा में पहुंचाया। वह अलग-अलग दलों से लड़े और वर्ष 1967, वर्ष 1977, वर्ष 1989 और वर्ष 1991 में हाथरस सीट से चुनाव जीते। सिकंदराराऊ सीट से पं. नेकराम शर्मा चार बार विधायक रहे। दो बार वह निर्दलीय भी जीतकर विधानसभा में पहुंचे। इसी प्रकार सादाबाद की जनता ने सबसे ज्यादा कुं.अशरफ अली खां को विधानसभा में पहुंचाया। वह वर्ष 1952, 1962, 1967 और फिर 1969 में जीते। यह चारों चुनाव उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर ही जीते। संवाद