न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
लोक नाट्य में स्वांग का देश-विदेश में डंका बजाने वाले स्वांग सम्राट पं. नथाराम गौड़ की आज जयंती है। पं. नथाराम गौड़ ने स्वांग के जरिये लोगों में देशभक्ति का भाव पैदा किया और समाज सुधार का संदेश भी दिया। उन्होंने कई महापुरुषों पर स्वांग भी लिखे। रंगमंच की पूरी दुनिया पं. नथाराम की प्रतिभा की कायल रही है। कई देशों की लाइब्रेरी ने पं. नथाराम की स्वांग रचनाएं संभालकर रखी हैं।
14 जनवरी 1874 को हाथरस जंक्शन के निकट गांव दरियापुर में जन्मे पं. नथाराम गौड़ जब हाथरस शहर आए तो इंदरमन स्वांग अखाड़े के कलाकार चिंरजीलाल से उनकी मुलाकात हुई। तब से ही वह स्वांग विधा से जुड़ गए। इसके बाद उन्होंने स्वांग के क्षेत्र में अपनी धाक जमा ली और एक व्यवसायिक मंडली भी बना ली। यह मंडली स्वांग का मंचन करती। मंडली ने देश में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, इंडोनेशिया, मारीशस, फिजी आदि देशों में स्वांग का डंका बजाया।
जानकार बताते हैं कि कैलिफ्रोर्निया यूनिवर्सिटी की ई-बुक्स लाइब्रेरी और शिकागो यूनिवर्सिटी की रेगेस्टीन लाइब्रेरी में वहां के विद्यार्थियों ने अपने शोध में पं. नथाराम की रचनाओं को शामिल किया। उनकी रचनाओं को लंदन स्थित इंडिया ऑफिस लाइब्रेरी और ब्रिटिश म्यूजियम में भी रखा गया है। पहले मनोरंजन के साधन वर्तमान की तरह तो थे नहीं, लिहाजा प्राचीन लोक नाट्य विधा स्वांग काफी लोकप्रिय हो गई। करीब 200 साल पुरानी इस विधा की देश-विदेश में धूम रही।
हालांकि पं. नथाराम गौड़ के समय में कई अखाड़े थे, लेकिन सबसे ज्यादा ख्याति नथाराम जी के अखाड़े ने ही पाई। उन्होंने अपने समय में स्वांग को देशभक्ति और समाज सुधार के संदेश का माध्यम भी बना दिया। पं. नथाराम गौड़ ने भक्त पूरनमल, संगीत रामायण, संगीत महाभारत, कत्लजान आलम, समर केसरी, अमर सिंह राठौर, महारानी तारा, सत्यवादी हरिशचंद्र, वीरांगना वीरमती, दिल्ली दरबार, नरसी का भात जैसे सैकड़ों स्वांगों की रचना की।