संवाद न्यूज एजेंसी, सासनी।
गर्मी बढ़ने के साथ ही लोगों को पानी की चिंता सताने लगी है। गांवों में बने ओवरहेड टैंक इस जरूरत के समय शोपीस बनकर रह गए हैं। ग्राम पंचायत अजरोई में वर्ष 2005 में ग्रामीण पेयजल योजना के तहत 20 लाख रुपये खर्च कर बनाया गया ओवरहेड टैंक ग्रामीण क्षेत्र के बाशिंदों की पानी की जरूरत पूरी नहीं कर पा रहा है।
कभी पाइप लाइन लीक हो जाती है तो कभी वाल्व टूट जाता है। लंबे समय से कोई यहां कोई ऑपरेटर भी तैनात नहीं है। नलकूपों के संचालन के लिए पूर्व में भेजे गए ऑपरेटर को भी विभाग ने वापस बुला लिया है। नतीजा, यह ओवरहेड टैंक आज भी रामभरोसे चल रहा है। इस टैंक से ग्राम पंचायत के मजरे अजरोई और लालगढ़ी में पानी की आपूर्ति होती है।
इससे कुल 308 पानी के घरेलू कनेक्शन जुड़े हैं। गांव में कोई सार्वजनिक टोंटी तक नहीं है। पंचायत में करीब 45 हैंडपंप लगे हैं। इनमें से 10 हैंडपंप री बोर कराए गए हैं। गांव की आबादी 2011 की जनगणना के आधार पर 2,435 है। वर्तमान में ग्राम पंचायत की आबादी करीब 4,500 है। पूरी पंचायत में पाइप लाइन बिछी है। ग्राम पंचायत द्वारा ओवरहेड टैंक की रंगाई-पुताई कराई गई है, लेकिन ठेकेदार का काम संतोषजनक नहीं है।
- ग्रामीण जनता के लिए गांव में ओवरहेड टैंक बना हुआ है, लेकिन जनता को आवश्यकता के अनुरूप पानी नहीं मिल पाता है। ऑपरेटर की कमी होने के कारण कभी लाइन लीक हो जाती है। कभी वाल्व टूट जाता है। ऑपरेटर की तैनाती होना जरूरी है।
-हपेंद्र सिंह, ग्राम प्रधान
- गांव के ओवरहैंड टैंक का निर्माण वर्ष 2005 में हुआ था, लेकिन टंकी चालू नहीं हुई थी। उस समय घरों में कनेक्शन नहीं हुए थे। यह टैंक जनता की आवश्यकता के अनुरूप पानी की आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। गर्मी में पानी के लिए बहुत परेशान होना पड़ता है।
-संदीप चौधरी, क्षेत्र पंचायत सदस्य
- गांव में पानी की आपूर्ति के लिए टंकी तो बनी है, लेकिन यहां कोई कर्मचारी तैनात नहीं है। इस कारण जनता को पानी की आपूर्ति नहीं मिल पाती है। पानी की जरूरत पूरी करने के लिए लोग आज भी हैंडपंपों पर ही निर्भर हैं।
-नगेंद्र सिंह
- गांव में पानी की आपूर्ति के लिए टंकी तो बनी है, लेकिन इसकी देखरेख नहीं हो पाती है। कोई कर्मचारी तैनात नहीं है। वर्तमान में पेयजल की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पाती है। कर्मचारी का तैनात होना जरूरी। तभी पंप सुचारु रूप से चल सकेगा।
-कान्हा चौधरी
- शासन द्वारा लाखों रुपये खर्च करके पानी की टंकी बनवाई गई है। कुछ दिन कर्मचारी तैनात रहा था तो लोगों को पानी की मिली थी। आज कोई कर्मचारी तैनात नहीं है। ग्रामीण जनता को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। यहां कर्मचारी का होना आवश्यक है।
-देवेश कुमार