न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कहने को तो जिला अस्पताल है, लेकिन यहां पर आने वाले मरीज जब डॉक्टरों के अभाव में उपचार न मिलने से निराश होते हैं तो लगता है कि इससे अच्छा हाल तो जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का होगा। इसके पीछे डॉक्टरों की भारी कमी है, क्योंकि ओपीडी में आने वाले 1200 से 1500 तक मरीज मात्र तीन डॉक्टरों के हवाले ही है।
जिला अस्पताल में हर दिन करीब 1200 मरीज नए पहुंचते हैं। इनके अलावा यहां पर 200 से 300 तक पुराने मरीज भी आते हैं। ये सभी मरीज केवल तीन डॉक्टरों के हवाले हैं। उसमें भी एक डॉक्टर ऐसे हैं जो ट्रेनिंग ले रहे हैं। बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ रही। दवा काउंटर, पर्चा काउंटर से लेकर पैथोलॉजी लैब व रजिस्ट्रेशन काउंटर पर मरीजों की लंबी कतारें लगी थी। लेकिन सभी को वहीं दवाएं दी जा रही थीं।
25 पदों के सापेक्ष केवल आठ डॉक्टरों की ही है तैनाती
जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 25 पद हैं, जिसके सापेक्ष मात्र आठ डॉक्टर ही यहां पर तैनात हैं। उनमेें से चार से पांच डॉक्टर इमरजेंसी ड्यूटी में लगे रहते हैं। इसके अलावा शेष डॉक्टर कभी ओपीडी, कभी पोस्टमार्टम तो कभी कोर्ट केस आदि में लगे होते हैं। जिसके कारण मरीजों को सही उपचार नहीं मिल पा रहा है।
जनरल फिजीशियन की सीट भी है खाली
बुखार के रोगियों के लिए जनरल फिजीशियन की आवश्यकता सबसे अधिक होती है, लेकिन जिला अस्पताल में एक भी जनरल फिजीशियन नहीं है। यहां पर जो भी डॉक्टर हैं, वहीं सभी प्रकार के रोगों की दवाएं दे रहे हैं। ऐसे में मरीजों को उस दवा का लाभ भी नहीं होता है और फिर उन्हें निजी डॉक्टरों का रुक करना पड़ता है।
- हमारे यहां अब डेंगू की जांच भी शुरू कर दी है। डेंगू के मरीजों को वार्ड में भर्ती करके उपचार दिया जा रहा है। यह बात सही है कि डॉक्टरों की हमारे यहां भारी कमी है, फिर भी जो भी संसाधन हैं, उनमें बेहतर से बेहतर कार्य किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. सूर्य प्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल।