संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
क्षेत्र के गांव कुरसंडा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का निर्माण प्रदेश सरकार ने क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा की सुविधा देने के लिए पिछले वर्ष ही कराया था। सीएचसी के भवन का निर्माण तो हो गया, लेकिन वहां अभी तक चिकित्सकों और कर्मियों की कमी है। महज एक चिकित्सक और एक फार्मासिस्ट के भरोसे पूरा सीएचसी चल रहा है। इन दोनों की ड्यूटी भी कोविड में लगा रखी है।
कभी-कभी सीएचसी पर दोनों में से ही एक ही मरीजों को काम करते हुए मिलते हैं। दोनों का व्यवहार मरीजों के प्रति बेहद सहानुभूतिपूर्ण है, इसलिए मरीजों को इनके व्यवहार से तो कोई शिकायत नहीं है, लेकिन सुविधाओं की कमी को देखकर मरीज और उनके तीमारदार शासन-प्रशासन को जरूर कोसते हुए नजर आते हैं।
स्टाफ एवं डॉक्टरों की कमी के चलते यहां गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज नहीं आते। सीएचसी पर एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, प्रयोगशाला आदि के कमरे तो बने हुए हैं, लेकिन न तो वहां उपकरण हैं और न हीं काम करने वाला स्टाफ। ग्रामीणों का कहना है कि कहीं यह सीएचसी क्षेत्र के लिए दिखावा बनकर न रह जाए।
मरीजों का दर्द
सीएचसी पर एक डॉक्टर और एक ही फार्मासिस्ट हैं। फार्मासिस्ट की ड्यूटी भी कोविड में लगी हुई है। डॉक्टर ही बीमार मरीजों को देखते हैं और दवा देते हैं।
-जसवेंद्र सिंह
- इस सीएचसी पर महिलाओं के इलाज के लिए न तो कोई महिला डॉक्टर है और न ही कोई नर्स। इस कारण महिलाएं अपने इलाके लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्र जाती हैं।
-प्रवेश देवी
- यहां सभी को एक जैसी ही दवा दी जाती है, वह भी कम असरदार होती है। अस्पताल में भर्ती की भी कोई सुविधा नहीं है। अस्पताल का कोई फायदा नहीं मिल रहा।
-गंगा देवी
- सीएचसी के नाम पर यहां एक इमारत खड़ी कर दी गई है। यहां एक ही व्यक्ति सभी ड्यूटी करता है। दवा की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। दवा कम ही असर करती है।
- निरजंन सिंह
- इस गांव में सीएचसी पिछले वर्ष ही बनकर तैयार हुआ है। पूरे प्रदेश में डॉक्टरों की कमी है। यह कमी सरकार ही पूरी करेगी। इस पर धीरे-धीरे स्टाफ और डॉक्टर बढ़ते जाएंगे। जितनी दवा स्वास्थ्य विभाग उपलब्ध कराता है, वह सभी रोगियों को उपलब्ध कराते हैं। मेरा यही प्रयास है कि सीएचसी पर आने वाले प्रत्येक मरीज को अधिक से अधिक संतुष्ट करूं। उनको उनकी बीमारी के लिए अच्छी सलाह और दवा दूं, जिससे उनको फायदा मिले।
- डॉ. जेपी सिंह, सीएचसी प्रभारी