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हाथरस : स्वास्थ्य, शिक्षा, पिछड़ते उद्योग धंधे जैसे मुद्दे उठे जोर-शोर से

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महिलाओं से चर्चा करती सत्ता का संग्राम की टीम। संवाद - फोटो : HATHRAS
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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अमर उजाला का चुनावी रथ सत्ता का संग्राम सोमवार को ब्रज की द्वार देहरी हाथरस में पहुंचा। यहां सबसे पहले अमर उजाला टीम ने चाय पर चर्चा के दौरान लोगों की नब्ज टटोली। लोगों ने तमाम मुद्दे टीम के सामने उठाए। सरकार के कामकाज से लोग कितना संतुष्ट हैं, इस पर अपनी राय जाहिर की और स्थानीय समस्याओं का भी जिक्र किया।
इसके बाद जब महिलाओं से टीम की बातचीत हुई तो महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तो संतुष्टि जताई, लेकिन शहर की टूटी सड़कों और गंदगी पर नाराजगी जताई। सभी का यह भी कहना था कि जिले में उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं है। इसके उपरांत टीम ने जब राजनेताओं से बातचीत की तो राजनेताओं ने एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए। भाजपाइयों ने अपनी उपलब्धि गिनाई तो विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा।
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मंहगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठाए, जिले की लचर स्वास्थ्य सेवाओं का भी किया जिक्र
शहर में रोडवेज बस स्टैंड के बाहर सत्ता का संग्राम कार्यक्रम में चाय पर चर्चा के दौरान लोगों ने सरकार के कामकाज का जिक्र किया तो महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे भी उठाए। जिले की लचर स्वास्थ्य सेवा का लोगों ने जिक्र किया और यहां से पिछड़ते उद्योग धंधे व बंद पड़ी कुछ इकाइयों का भी जिक्र किया। साथ की लोगों का यह भी कहना था कि यहां उच्च तकनीकी शिक्षा के संस्थान खोले जाने चाहिए।
चर्चा के दौरान राजीव वार्ष्णेय ने कहा कि हाथरस में भ्रष्टाचार और महंगाई का बड़ा मुद्दा है। कोरोनाकाल में व्यापार काफी कम हुआ है। भ्रष्टाचार अपने चरम सीमा पर है। खाद्य विभाग के एक अफसर के खिलाफ शिकायत की थी। सारे साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सुनील अग्रवाल का कहना था कि सरकार भ्रष्टाचार को काबू नहीं कर पाई है। अफसरों पर लगाम नहीं लगा पाई।
अधिकारियों द्वारा जो भ्रष्टाचार किया गया, उससे जनता परेशान है। यहां 20 साल से पुल की मांग हो रही थी। उसे भाजपा सरकार ने बनवाया है। मैं मौजूदा सरकार से 75 प्रतिशत संतुष्ट हूं। साकेत का कहना था कि हाथरस में पराग डेयरी है, लेकिन अभी बंद पड़ी हुई है। आलू का काफी उत्पाद होता है, लेकिन कोई उद्योग नहीं लगा। यहां कई तरह की इंडस्ट्री लग सकती है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
चुनाव के वक्त मुद्दों पर बात होती है, लेकिन वोट जाति और धर्म के आधार पर ही पड़ते हैं। मूलचंद्र वार्ष्णेय ने कहा कि सदर विधानसभा में भाजपा मजबूत है। जातिगत समीकरण भाजपा के पक्ष में है। शिवम भारद्वाज ने कहा कि शहर का विकास अब दिखने लगा है। आज शहर में पार्क बने हैं। स्वच्छता को लेकर काम हो रहे हैं। सड़कें बन रही हैं। ट्रैफिक की स्थिति थोड़ी खराब है।
सरकार ने हाल ही में यहां के लिए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किया है। अरुण उपाध्याय ने कहा कि यहां स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है। जिला अस्पताल की समस्या बहुत ही खराब है। छोटी सी भी समस्या हो जाए तो जिला चिकित्सालय के डॉक्टर तुरंत अलीगढ़ के लिए रेफर कर देते हैं। टिंकू सिंह ने कहा कि पिछली सरकार के मुकाबले काफी बेहतर काम हुआ है।
चिकित्सा व्यवस्था भी बेहतर हुई है। नितिन अग्रवाल ने कहा कि व्यवसायियों की हालत खराब है। सलेमपुर में इंडस्ट्री लगाने के लिए जगह ली गई थी, लेकिन मामला कोर्ट में चला गया। सरकार से कई बार मांग की, लेकिन कोई पॉजिटिव रिस्पांस नहीं मिला। राजकुमार शर्मा ने कहा कि कोरोना के चलते पूरी दुनिया में हालत खराब है। सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती है।
कुवेश कौशिक ने कहा कि कभी हमारा हाथरस दालों की फैक्टरी और रेडीमेड फैक्टरी के लिए अलग पहचान बनाए हुआ था। क्या कभी किसी सरकार ने इस ओर ध्यान दिया? आगे इस क्षेत्र में काम हो तो यहां के बहुत से लोगों को रोजगार मिला। सत्यप्रकाश ने कहा कि यहां कांच का कारोबार पूरी तरह से खत्म हो गया।
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कोई भी सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा के मुद्दे पर बात नहीं करती है। हिंदू-मुस्लिम पर वोट पड़ते हैं। जनप्रिय शर्मा ने कहा कि भ्रष्टाचार और महंगाई पर कंट्रोल करना चाहिए। इस मौके पर अशोक कुमार गोला, प्रवीण वार्ष्णेय आदि ने भी कई समस्याओं का जिक्र किया।
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