गौरव भारद्वाज, हाथरस।
सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बेशक कई योजनाएं चला रही है, लेकिन जिले के ईंट-भट्ठा कारोबारी मंदी की मार से जूझ रहे हैं। उनका उद्योग बर्बादी के कगार पर है। कोरोना महामारी के बाद इस उद्योग पर छाये मंदी के बादल अभी तक छंट नहीं सके हैं।
एक तरफ रोजमर्रा की जिंदगी की जरूरत का हर सामान लगातार महंगा हो रहा है, लेकिन चार साल बाद भी ईंट के दाम पुराने ही हैं। आज भी ईंट पांच रुपये प्रति नग के हिसाब से बिक रही है, जबकि कारोबारियों का दर्द है कि कोयला, लकड़ी और माल भाड़ा सहित सभी कच्चे माल की कीमतें बढ़ चुकी हैं।
इस कारण काफी कारोबारी इस उद्योग से दूरी बनाने का मन बना चुके हैं। उल्लेखनीय है कि बदलते समय में अधिकांश कारोबार पर डीजल की महंगाई की मार पड़ रही है। इस कारण जनता को महंगाई का दंश झेलना पड़ रहा है। खास बात यह है कि चार साल पहले कोयला नौ हजार रुपये टन था।
आज वही कोयला दोगुने दामों पर पहुंच गया है। लकड़ी के रेट भी 20 फीसदी बढ़ गए है। माल भाड़ा भी दूरी के हिसाब से वाहन स्वामी ले रहे हैं। इन सबके बीच ईंट के दाम आज भी वहीं पर टिके हुए हैं। इस कारण कारोबारियों के लिए भट्ठों का संचालन करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इस कारण जिले के डेढ़ सौ ईंट भट्ठों के संचालन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
इस तरह फिर रफ्तार पकड़ सकता है भट्टा कारोबार
भट्ठा करोबारियों के लिए सरकार द्वारा कोई योजना संचालित की जाए। इसके अलावा इनको सब्सिडी दी जाए। ईंट का प्रयोग सरकारी कामों में बढ़ाया जाए, तार्कि इंट की खपत बढ़े। हाथरस आलू का क्षेत्र है। इस बार आलू की स्थिति भी अच्छी नहीं है। इस कारण लोगों के पास पैसे की कमी है। कोरोना प्रभावित कारोबार को प्रदेश स्तर से सुविधाएं देने के साथ राहत दी जाए। इसके संचालन के नियमों में रियायत दी जाए। संवाद
हजारों लोगों की रोजी-रोटी चलती है इस कारोबार से
जिले में करीब 150 ईंट-भट्टों पर काम करने के लिए बिहार व अन्य प्रांतों से हजारों की संख्या में श्रमिक आते हैं। वर्ह इंटों की पथाई से लेकर उनको पकाने तक यहां रहते हैं। बारिश के मौसम में कारोबार खामोश हो जाता है। यदि कारोबारियों ने ने दूरी बनाई तो श्रमिकों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा होगा।
- कोयला, लकड़ी और माल भाड़ा आदि में बढ़ोत्तरी हो गई। चार साल बाद भी ईट के रेटों में ईजाफा नहीं हुआ है। कोरोना के चलते वर्तमान में बाजार मंदा चल रहा है। हाथरस आलू का क्षेत्र है। इस बार आलू की स्थिति अच्छी नहीं रही है। इस कारण पैसे की कमी है। कारोबार पूरी तरह से प्रभावित है। सरकार द्वारा भट्ठा कारोबारियों का राहत देने वाली योजना चलाई जानी चाहिए।
-मुकेश दीक्षित, अध्यक्ष भट्ठा एसोसिएशन
- जिले में डेढ़ सौ के करीब भट्ठों का संचालन होता है। इनसे हजारों की संख्या में श्रमिकों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। सरकार ने जिस तरह हींग व रेडीमेड कारोबार को एक जनपद एक उत्पादन (ओडीओपी) योजना में शामिल किया है, उसी तरह भट्ठा कारोबारियों के लिए योजना चलाई जाए, ताकि भट्ठा कारोबार को संजीवनी मिल सके।
-कमल गोयल, महामंत्री भट्ठा एसोसियेशन