न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में विदेश से आने वाले लोगों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा होम आइसोलेट किया जा रहा है, लेकिन कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास संसाधनों की कमी है। सिकंदराराऊ, मुरसान व हाथरस में हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में नए स्वरूप से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। कुल मिलाकर सरकार के निर्देश के बाद भी स्वास्थ्य सेवाएं वेंटीलेटर पर सिसकियां ले रही हैं। इसका खामियांजा जिले वासियों को पीक सीजन में भुगतना पड़ता है।
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में एल वन श्रेणी का वार्ड एमडीटीबी अस्पताल में बनाया है। इसमें करीब 40 बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा चार एल वन श्रेणी के अस्पताल हैं। इसमें सासनी, महौ, मुरसान और सिकंदराराऊ सीचएसी शामिल हैं। ये तैयारियां बच्चों के लिए आने वाली लहर के दौरान की गई थी। संवाद
जिले में कई ऑक्सीजन प्लांट हुए तैयार
हाथरस। सरकार ने कोरोना के दौरान स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया है। जिला अस्पताल में एक हजार लीटर प्रति मिनट क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। जांच के लिए आरटीपीसीआर प्रयोगशाला भी बनाई गई है। बीएसएल लैब भी तैयार हो गई है। इसके अलावा सिकंदराराऊ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर 250 लीटर प्रति मिनट क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। मुरसान सीएचसी पर भी ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। सासनी में भी मरीजों के भर्ती करने का इंतजाम किया गया है। इसके अलावा तमाम इंतजाम किए गए हैं। संवाद
चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर
हाथरस। जिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 100 से अधिक चिकित्सकों की आवश्यकता है मगर इस समय मात्र पांच दर्जन के करीब चिकित्सक हैं। फिजिशियन व बाल रोग विशेषज्ञ भी न के बराबर हैं। इसके अलावा दवाओं की भी काफी कमी है। संवाद
ओमिक्रॉन से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पर पर्याप्त इंतजाम है। जितने भी चिकित्सक हैं, उन्हें प्रशिक्षित कर जिम्मेदारी दी गई है। आमजन को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए प्रयास लगातार जारी हैं।
-डॉ. चंद्रमोहन चतुर्वेदी, सीएमओ हाथरस