संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
विधानसभा चुनाव की तिथि की घोषणा होने के बाद से ही सियासी सरगर्मियां और तेज हो गई हैं। टिकट के कई दावेदार दिल्ली और लखनऊ में डेरा जमाए हुए हैं और टिकट पाने के लिए हर फार्मूले का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं उनके समर्थक क्षेत्र में उनके पक्ष में हवा बनाने में लगे हैं।
इधर, प्रमुख राजनीतिक दलों का हाईकमान भी प्रत्याशी घोषित करने से पहले दावेदारों के बारे में पूरा फीडबैक ले रहा है। हाईकमान यह भी देख रहा हैं कि उनके विरोधी दल ने किस जाति, बिरादरी के व्यक्ति को टिकट दिया या दे सकती है। इसका आकलन पूरी बारीकी से किया जा रहा है।
इस जिले में तीसरे चरण में 20 फरवरी को मतदान होगा। बसपा ने यहां तीनों सीटों से उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने हाथरस से संजीव कुमार काका, सादाबाद से डॉ. अविन शर्मा और सिकंदराराऊ से अवधेश कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। बसपा को छोड़कर अन्य किसी बड़े दल ने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं।
ऐसे में टिकट पाने के लिए घमासान मचा हुआ है। सबसे ज्यादा दावेदार भाजपा में हैं। सपा और रालोद के दावेदार भी टिकट पाने के लिए अपने सियासी आकाओं के संपर्क में हैं। कुछ ने लखनऊ तो कुछ ने दिल्ली में डेरा डाल रखा है।
भाजपा अपनी एक रणनीति के तहत हमेशा ऐन वक्त पर प्रत्याशियों की घोषणा करती है। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी अभी कम से एक सप्ताह बाद प्रत्याशियों की घोषणा करेगी। पार्टी आलाकमान जातिगत आंकड़ों से लेकर अन्य बिंदुओं पर भी पूरा फीडबैक ले रहा है। इसके लिए पहले भी भाजपा की टीमें चुपचाप यहां आकर सर्वे कर चुकी हैं।
सूत्रों की मानें यह भी आलाकमान देख रहा है कि विरोधी दल ने किस बिरादरी का उम्मीदवार खड़ा किया है या कौन प्रबल दावेदार है। इसके हिसाब से कौन सी बिरादरी का उम्मीदवार उनकी पार्टी की जीत की राह को आसान बना देगा। यही आकलन सपा और रालोद नेतृत्व कर रहा है।
सपा-रालोद के गठबंधन के चलते यह तय माना जा रहा है कि सादाबाद की सीट रालोद और हाथरस व सिकंदराराऊ की सीट सपा के खाते में आएंगी। इधर, कांग्रेस आलाकमान भी पूरी स्थिति को देखकर प्रत्याशी घोषित करेगी। बहरहाल, जिन दलों ने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। उनके कार्यकर्ताओं में खासी बैचेनी देखी जा सकती है।