न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सोने के गहने खरीद पर उसकी गुणवत्ता को लेकर रहने वाली आशंका अब खत्म होगी। बिना होलमार्क के कोई सराफा कारोबारी सोना नहीं बेच पाएगा। एक जून से यह नियम लागू हो गया है। इसे लेकर शहर के एक दर्जन से अधिक कारोबारियों ने एक नोएडा की होलमार्क कंपनी से ऑनलाइन बैठक भी की।
अब जल्द ही खुली बैठक कर होलमार्क की प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया जाएगा। इससे लोगों को सोने की गुणवत्ता की गारंटी भी मिलेगी। उल्लेखनीय है कि शहर में सराफा की करीब 200 दुकानें हैं। अब इन दुकानों पर ग्राहकों को शुद्ध सोना मिलेगा। इस नई व्यवस्था में ग्राहक ब्रांडेड कंपनी के शोरूम के समान कीमत चुकानी होंगी।
35 से 40 रुपये एक गहने की होलमार्क लागत
शहर के सराफा कारोबारियों द्वारा होलमार्क की लागत भी ग्राहकों से वसूल की जाएगी। गहने की होलमार्किंग की लागत 35 से 40 रुपये आएगी। ग्राहक जितने आयटम खरीदेंगे, उन्हें होलमार्क की कीमत भी अदा करना होगी।
भारी पड़ेगा ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करना
होलमार्किंग नियम के अनुसार ग्राहक को 22 कैरेट सोना बताकर गहने बेचने पर जांच में यह 18 कैरेट पाया गया तो धोखाधड़ी करने वाले कारोबारी को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। नई व्यवस्था लागू होने से सराफा कारोबारियों ने गहनों के पुराना स्टॉक को निपटाना शुरू कर दिया है।
सोने की शुद्धता को इस तरह समझें
24 कैरेट 99 प्रतिशत से अधिक, 23 कैरेट पर 95 प्रतिशत से अधिक, 22 कैरेट पर 91 प्रतिशत से अधिक, 21 कैरेट पर 87 प्रतिशत से अधिक, 18 कैरेट पर 75 प्रतिशत, 17 कैरेट पर 70 प्रतिशत, 14 कैरेट पर 58 प्रतिशत से अधिक सोना होगा। इसके अलावा बिना बिल के सोना बिकना बंद हो जाएगा।
एक जून से होलमार्क का सोना बेचने का नियम लागू हो गया है। होलमार्क को लेकर नोएडा की एक कंपनी के साथ ऑनलाइन बैठक भी हुई है। एक दर्जन से अधिक कारोबारी इस बैठक में शामिल हुए। अब इस सप्ताह में खुली बैठक में इस नियम को अमलीजामा पहनाया जाएगा।
-मोहनलाल अग्रवाल, अध्यक्ष सराफा एसोसिएशन