अशोक वार्ष्णेय
सादाबाद। प्रदेश में वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में राजनीतिक दल और उनके कार्यकर्ता पिछले दो माह से जुटे हुए हैं। अपने दल की जीत तय करने के लिए जनता के बीच तमाम मुद्दों को उठाने लगे हैं। गांव-गांव जाकर जनसंपर्क का सिलसिला जोरों पर है तो प्रचार के जरिये सभी पार्टियों के टिकट के दावेदारों ने अपने चेहरे भी जनता के बीच चमकाने शुरू कर दिए हैं। आजादी के बाद से ही सादाबाद विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक मिजाज बेहद दिलचस्प रहा है।
वर्ष 1952 से लेकर वर्ष 2017 तक सादाबाद से कुल 18 विधायक चुने गए हैं। इनमें सबसे अधिक चार बार कांग्रेस के कुंवर अशरफ अली खां विधायक चुने गए हैं। मुस्दमंद अली खां उर्फ छाबी मियां दो बार और चौधरी विशंभर सिंह को भी दो बार विधायक बनने का मौका का क्षेत्र की जनता ने दिया है। 1980 के चुनाव के बाद से 2017 तक कांग्रेस का कोई भी प्रत्याशी विधायक नहीं बन सका है। भाजपा ने अपनी स्थापना से लेकर अब तक इस विधानसभा सीट पर दो बार ही विजय प्राप्त की है। चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल (बीकेडी), लोकदल व राष्ट्रीय लोकदल ने इस क्षेत्र से सात बार विजय प्राप्त की है और एक बार समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी (ससोपा), सपा व बसपा व जनता पार्टी के प्रत्याशियों को भी इस क्षेत्र ने विधायक चुना है। आने वाले विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों की घोषणा होने के बाद मुकाबला बहुत दिलचस्प होने के आसार हैं।
सादाबाद विधानसभा सीट पर सबसे अधिक समय 1952 से लेकर 1989 तक हुए 10 चुनावों में से 1957, 1974, 1977 को छोड़कर बाकी समय करीब 27 वर्ष तक नवाब परिवार का दबदबा रहा है और इसी परिवार के दो सदस्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। इस परिवार के अलावा आज तक क्षेत्र से चुने गए किसी भी विधायक को प्रदेश सरकार में मंत्री बनने का मौका नहीं मिल सका है। संवाद
सादाबाद विधानसभा क्षेत्र का चुनावी इतिहास
1952 में कुंवर अशरफ अली खां (कांग्रेस)
1957 में टीकाराम पुजारी (निर्दलीय)
1962 में कुंवर अशरफ अली खां (कांग्रेस)
1967 में कुंवर अशरफ अली खां (कांग्रेस)
1969 में कुंवर अशरफ अली खां- कांग्रेस
1974 में रामप्रकाश यादव (बीकेडी)
1977 में हुकुमचंद्र तिवारी (जनता पार्टी)
1980 में कुंवर जावेद अली खां (कांग्रेस)
1985 में कुंवर मुस्दमंद अली खां उर्फ छाबी मियां (लोकदल)
1989 में कुंवर मुस्दमंद अली खां उर्फ छाबी मियां (जनता दल)
1991 में चौधरी बृजेंद्र सिंह (भाजपा)
1993 में चौधरी विशंभर सिंह (जनता)
1996 में चौधरी विशंभर सिंह (भाजपा)
2001 में विशंभर सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में रामसरन आर्य (रालोद)
2002 में प्रताप चौधरी (रालोद)
2007 में डॉ. अनिल चौधरी (रालोद)
2012 में देवेंद्र अग्रवाल (समाजवादी पार्टी)
2017 में रामवीर उपाध्याय (बसपा)
अशरफ अली, जावेद अली को मिला मंत्री बनने का मौका
सादाबाद। विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित कुंवर अशरफ अली खां सन 1970 में पंडित कमलापति त्रिपाठी की सरकार में पहली बार राज्यमंत्री बनने का मौका मिला। वहीं उनके पुत्र कुंवर जावेद अली खां को भी 1980 में बनी वीपी सिंह की सरकार में पहले उपमंत्री और बाद में राज्यमंत्री बनने का अवसर मिला था। संवाद
चुनाव हारने के बाद भी अशरफ को बनाया था उत्तर रेलवे बोर्ड का चेयरमैन
सादाबाद। 1974 के विधानसभा के आम चुनाव में बीकेडी के रामप्रकाश यादव से जब कुंवर अशरफ अली खां पराजित हो गए थे और कुंवर अशरफ अली खां तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के काफी नजदीकी थे और चुनाव में हारने के बाद इंदिरा गांधी ने उन्हें उत्तर रेलवे बोर्ड इलाहाबाद का चेयरमैन बनाया था और उत्तर रेलवे का चेयरमैन बनने के बाद कुंवर अशरफ अली खां ने सादाबाद क्षेत्र सहित प्रदेश के कई जिलों के हजारों युवाओं को रेलवे में रोजगार देकर एक मिसाल कायम की है और इसके लिए कुंवर अशरफ अली खां को आज भी याद किया जाता है। रेलवे में उनके द्वारा लगाए गए हजारों नौजवानों में से अब सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। संवाद
पहले मथुरा जनपद का हिस्सा थी सादाबाद तहसील
सादाबाद। तहसील सादाबाद पहले मथुरा जनपद का हिस्सा थी, लेकिन 23 मई 1997 को सादाबाद तहसील के तीन ब्लॉक बल्देव, सादाबाद और सहपऊ में से सादाबाद व सहपऊ ब्लॉक को नव सृजित जनपद हाथरस में बसपा सरकार ने शामिल कर दिया था। पहले विधानसभा क्षेत्र सादाबाद में सहपऊ के अलावा मथुरा जिले का बल्देव ब्लॉक भी आंशिक रूप से था। 2007 तक सादाबाद सीट का चुनाव पुराने ही क्षेत्र के आधार पर हुआ। 2012 में प्रदेश में नये परिसीमन के बाद इस सीट से बल्देव क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव हटा दिए गए और इसमें मुरसान क्षेत्र के एक कानूनगो सर्किल को शामिल किया गया था। परिसीमन के बाद वर्तमान विधायक रामवीर उपाध्याय का गांव बामौली भी इसी विधानसभा क्षेत्र से जुड़ गया। संवाद