न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
डीजल और टोल टैक्स के दामों में बढ़ोतरी ने ट्रांसपोर्ट कारोबार की कमर तोड़कर रख दी है। आमदनी के सापेक्ष खर्चे अधिक होने से ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की करीब 50 फीसदी गाड़ियां खड़ी हुई हैं। कच्चे माल की आवक कम होने के कारण वाहनों के लिए माल भी पर्याप्त नहीं है। इससे कारोबार प्रभावित है। ट्रांसपोर्ट कारोबार को हर रोज लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि जिले में करीब पांच हजार लोडर वाहन हैं। ये वाहन दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान आदि प्रांतों के लिए हर रोज चलते हैं। बाहर से कच्चा माल भी लेकर आते हैं। बाहर से संक्रमण के चलते जिले में कच्चे माल की आवक कम है। इस कारण यहां फैक्टरियों में माल तैयार नहीं हो पा रहा है। काफी कम वाहनों को ही भाड़ा मिल पा रहा है। जिले से इन-दिनों सब्जी और नमकीन आदि सामान की दूसरे शहरों और राज्यों के लिए आपूर्ति हो रही है। इसके अलावा डीजल के रेट 87 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गए हैं। टोल टैक्स पर हर रोज कीमतों में इजाफा हो रहा है। इस कारण गाड़ियों का खर्चा तक नहीं निकल पा रहा है।
इसके अलावा जिन वाहनों पर कर्ज है, उन्हें दूसरे शहरों में फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी पकड़ रहे हैं और अवैध वसूली कर रहे हैं। इस वजह से भी ट्रांसपोर्ट कारोबारी खासे परेशान हैं। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की युवा इकाई के जिलाध्यक्ष बंशी पंडित का कहना है कि बाहर से कच्चा माल न आने के कारण यहां भी फैक्टरियों में माल तैयार नहीं हो पा रहा है। खर्चा बढ़ गया है। भाड़े में बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस कारण वाहनों का संचालन भी प्रभावित है। ट्रांसपोर्ट कारोबार को हर रोज लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।