मुरसान के गांव कथरिया में युवक की मौत के बाद विलाप करते परिजन व लगी भीड़
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रोजगार सेवक की आत्महत्या के बाद डीआरडीए और अन्य विभागीय अधिकारियों में खलबली मची रही। कुछ रोजगार सेवक भी मृतक के गांव पहुंच गए और वस्तुस्थिति की जानकारी की। अधिकारी भी यह पता लगाते रहे कि आखिर रोजगार सेवक की आत्महत्या के मामले में मृतक परिजनों द्वारा क्या कार्रवाई की जा रही है।
पिछले दिनों विकास भवन स्थित डीआरडीए कार्यालय में विभागीय अधिकारियों द्वारा मनरेगा की समीक्षा की गई थी। इस दौरान ब्लॉक मुरसान में मनरेगा में मानव दिवसों की प्रगति बढ़ाने को लेकर बीडीओ मुरसान को नोटिस दिया गया था। यह भी निर्देश जारी किए गए थे कि ग्राम पंचायत अधिकारी व रोजगार सेवक के जरिये मनरेगा की प्रगति को सुधारा जाए। नोटिस मिलने के बाद बीडीओ ज्योति शर्मा ने संबंधित पांच ग्राम पंचायत अधिकारियों को अपने रोजगार सेवकों की सेवा समाप्ति के नोटिस जारी कर सेवा समाप्ति कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
इस नोटिस के क्रम में ग्राम पंचायत अधिकारी ने कथरिया के रोजगार सेवक श्याम सुंदर को अंतिम नोटिस दिया था। नोटिस मिलने के बाद से रोजगार सेवक तनाव में था। परिजनों की मानें तो उसे 36 महीनों से मानदेय भी नहीं मिला था। इसके चलते उसने खुदकुशी की है। इधर, इस प्रकरण की जानकारी होते ही अधिकारियों में खलबली मच गई और रविवार होने के बावजूद पूरे मामले की टोह लेते रहे। गांव में मातम छाया रहा और मृतक के घर पर करुण कंद्रन मचा रहा।
मनरेगा के मानव दिवसों की खराब स्थिति को लेकर मुझे नोटिस मिला था। इसको लेकर उनके द्वारा संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारियों को रोजगार सेवकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए थे। रोजगार सेवक को मानदेय विगत में ही दिया गया है। इस रोजगार सेवक पर पारिवारिक क्लेश के चलते आत्महत्या की है।
-ज्योति शर्मा, बीडीओ मुरसान