हाथरस। पर्यावरण की सेहत सुधारने के लिए सरकार तो हर वर्ष बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चला ही रही है, इसके अलावा गोवंश भी अब पर्यावरण की सेहत सुधारने में मददगार बन रहे हैं। शहर निवासी एक युवा ने उस गोबर को स्वरोजगार का जरिया बना लिया है, जिसे किसी काम का नहीं समझा जाता।
इस युवा ने गोवंश के गोबर से निर्मित गूलरी, ढाल और तलवार सहित होली के लिए कई वस्तुएं तैयार की हैं। रवि मशीन के माध्यम से गोबर से कई आयटम बनाकर कलाकारी की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। उल्लेखनीय है कि शहर में एक दर्जन स्थानों पर छोटी व बड़ी होली का हर साल दहन होता है। होलिका दहन के दौरान कई कुंतल लकड़ी की खपत होती है। होलिका दहन के दौरान पर्यावरण की कोई फिक्र लोगों को नहीं रहती। संवाद
पांच साल पहले आया विचार, फिर किया अमल
हाथरस। शहर के रवि पहलवान ने बताया कि वह एक दर्जन गायों का पालन-पोषण करते हैं। एक दिन रवि के मन में विचार आया कि गाय के गोबर को काम में लिया जाए। वह खुद हार्डवेयर का इंजीनियर भी हैं। रवि ने एक मशीन तैयार की। अलग-अलग तरह के सांचे बनाए। इसके साथ गाय के गोबर से दीपक, गूलरी, उपले, गाय के गोबर की लकड़ी, ढाल, तलवार, मुकुट, नारियल आदि बनाना शुरू कर दिया। इसके साथ रवि के लिए यह गोबर रोजगार का जरिया बन गया। इन-दिनों होली पर्व को देखते हुए रवि गूलरी व होली की पूजा में प्रयोग होने वाला अन्य सामान तैयार कर रहे हैं। गूलरी को वह 30 रुपये प्रति किलो में बेच रहे हैं। एक किलो गूलरी 60 रुपये की बिक रही हैं। होली के बाद चैत्र नवरात्र की शुरुआत होगी। इस मौके पर अज्ञारी में कंडे का महत्व है। लिहाजा रवि ने कंडे भी तैयार किए हैं। इन्हें वह 20 रुपये में 20 की दर से बेच रहे हैं। हवन के लिए लकड़ी की भी बिक्री की जा रही है। संवाद
हाथरस : रवि। संवाद- फोटो : HATHRAS