न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र लाभार्थी पक्की छत की आस में दर-दर भटक रहे हैं। सालों बीतने के बाद भी आज तक उन्हें छत नसीब नहीं हुई। लोग सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगा-लगाकर थक चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें आवास योजना का लाभ नहीं मिला है।
पात्र होने के बाद भी गरीब तबके के लोग खुले आसमान के नीचे घास फूस की छत बना कर जीवन जीने को मजबूर है। गांव की पार्टी बंदी की वजह से कई पात्र लोगों का नाम सूची में में शामिल नहीं किया गया है। अधिकारियों के पास चक्कर लगाने के बाद यह आश्वासन मिलता है कि पात्र होने पर आवास मिल जाएगा। इसी आस में जीवन बीतता जा रहा है। लेकिन सपना पूरा नहीं हो रहा है। आज भी गरीब लोग आवास की आस में छप्पर में दिन काटने को मजबूर है। संवाद
- टिकारी निवासी प्रेमपाल का कहना है कि मेरी पत्नी राधा का नाम पात्रता सूची में है। काफी भाग-दौड़ करने के बाद आज तक आवास नहीं मिला है। मजबूर होकर झोपड़ी में प्लास्टिक का पर्दा डालकर गुजर कर रहे है। सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा लगा कर थक गए है। लेकिन झूठे आश्वासन देकर टरका दिया जाता है। मजदूरी के अलावा परिवार की आय का कोई साधन नहीं है।
- सोहन सिंह व सुरेंद्र सिंह निवासी भीम नगरिया माजरा विघैपुर का कहना है कि हम अपने पिता के सात बेटे हैं। तीन की शादी हो चुकी है। तीनों एक ही झोपड़ी में अपने परिवार के साथ रहते हैं। भूमिहीन होने के कारण मजदूरी करके गुजर बसर करते है। गांव की पार्टीबंदी के चक्कर में पात्रता सूची से दरकिनार कर दिया जाता है।
- पात्र होने पर मकान अवश्य मिल जाएगा। योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए ही चलाई गई है। लेकिन पहले की सर्वे पात्रता सूची समाप्त होने के बाद आगे नंबर आएगा। - दिनेश सिंघल, एडीओ पंचायत
- जो परिवार आवास के लिए पात्र है भूमिहीन है, मजदूरी करके भरण पोषण करते है। इनका आवास बनना आवश्यक है। ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ जरूर बनना चाहिए। - बनी सिंह बघेल, ग्राम प्रधान