हाथरस जनपद में शहर से लेकर देहात तक बिजली की जर्जर लाइनें झूल रही हैं। खंभे भी जर्जर हालत में हैं। जरा सा लोड पड़ने के साथ ही लाइनों में फॉल्ट हो जाते हैं। ओवर लोडिंग के चलते बिजली भी आंख मिचौली का खेल खेलती है। शहर से देहात तक दो लाख से अधिक उपभोक्ताओं की पहुंच से बिजली अभी दूर है। रिवेंप स्कीम के तहत चल रही टेंडर प्रक्रिया भी लटक गई है। इस कारण ओवरलोडिंग की समस्या खत्म नहीं हो सकी है। लोगों को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसे लेकर लोगों में गुस्सा है।
शहर से देहात तक 64 बिजलीघरों के जरिये दो लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति की जाती है। मुख्यालय 24 घंटे व टाउन को 22 घंटे व ग्रामीण अंचल को 18 घंटे बिजली देने का आदेश निगम स्तर से हैं। इस आदेश पर जिले में अमल नहीं हो पा रहा है। सबस्टेशन से बिजली की आपूर्ति की जाती है, लेकिन रास्ते में लाइनों में फॉल्ट के चलते शटडाउन लिया जाता है। इस कारण उपभोक्ताओं की पहुंच से बिजली दूर है।
10 हजार उपभोक्ता तो बढ़े, सिस्टम पुराना
बीते सालों में सौभाग्य योजना के तहत जिलेभर में 10 हजार उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन दिए गए। इन कनेक्शनों से बिजली सिस्टम पर लोड बढ़ा। आज तक संसाधनों की कमी रही। ओवरलोडिंग के चलते भी लोगों को फॉल्ट के चलते बिजली नहीं मिल पाती है।
रिवेम्प का अधिकारी कर रहे इंतजार
प्रदेश सरकार द्वारा बजट में रिवेंप योजना की शुरुआत की गई है। इसके तहत जिले में साढ़े पांच सौ किलोमीटर नई लाइन डाली जाएगी। करीब आठ सौ 50 नए ट्रांसफॉर्मर लगाने की कार्य योजना तैयार की गई। इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भी बनकर तैयार हो गई है। निगम स्तर पर टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने के कारण लाइन बदलने व ओवर लोडिंग को खत्म करने का काम आज तक शुरू नहीं हुआ है। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।