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Goodbye 2022: जर्जर खंभे, झूलते तार, लचर है हाथरस की बिजली व्यवस्था

Thu, 22 Dec 2022 11:51 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

हाथरस की बिजली व्यवस्था में कई खामियां साल 2022 में देखने को मिलीं। खंभे जर्जर पड़े हुए हैं। बिजली के तार झूलते नजर आ सकते हैं। लोड अगर बढ़ जाए, तो लाइनों में फॉल्ट होने से बिजली का जाना बना रहा। यहां तक कि शहर से देहात तक दो लाख से अधिक उपभोक्ताओं की पहुंच से बिजली अभी दूर है।
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खुले में रखा ट्रांसफॉर्मर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हाथरस जनपद में शहर से लेकर देहात तक बिजली की जर्जर लाइनें झूल रही हैं। खंभे भी जर्जर हालत में हैं। जरा सा लोड पड़ने के साथ ही लाइनों में फॉल्ट हो जाते हैं। ओवर लोडिंग के चलते बिजली भी आंख मिचौली का खेल खेलती है। शहर से देहात तक दो लाख से अधिक उपभोक्ताओं की पहुंच से बिजली अभी दूर है। रिवेंप स्कीम के तहत चल रही टेंडर प्रक्रिया भी लटक गई है। इस कारण ओवरलोडिंग की समस्या खत्म नहीं हो सकी है। लोगों को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसे लेकर लोगों में गुस्सा है।

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 शहर से देहात तक 64 बिजलीघरों के जरिये दो लाख से अधिक उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति की जाती है। मुख्यालय 24 घंटे व टाउन को 22 घंटे व ग्रामीण अंचल को 18 घंटे बिजली देने का आदेश निगम स्तर से हैं। इस आदेश पर जिले में अमल नहीं हो पा रहा है। सबस्टेशन से बिजली की आपूर्ति की जाती है, लेकिन रास्ते में लाइनों में फॉल्ट के चलते शटडाउन लिया जाता है। इस कारण उपभोक्ताओं की पहुंच से बिजली दूर है।

10 हजार उपभोक्ता तो बढ़े, सिस्टम पुराना
बीते सालों में सौभाग्य योजना के तहत जिलेभर में 10 हजार उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन दिए गए। इन कनेक्शनों से बिजली सिस्टम पर लोड बढ़ा। आज तक संसाधनों की कमी रही। ओवरलोडिंग के चलते भी लोगों को फॉल्ट के चलते बिजली नहीं मिल पाती है।
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रिवेम्प का अधिकारी कर रहे इंतजार
प्रदेश सरकार द्वारा बजट में रिवेंप योजना की शुरुआत की गई है। इसके तहत जिले में साढ़े पांच सौ किलोमीटर नई लाइन डाली जाएगी। करीब आठ सौ 50 नए ट्रांसफॉर्मर लगाने की कार्य योजना तैयार की गई। इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भी बनकर तैयार हो गई है। निगम स्तर पर टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने के कारण लाइन बदलने व ओवर लोडिंग को खत्म करने का काम आज तक शुरू नहीं हुआ है। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।

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नियमित कर्मियों का संकट, निगरानी में अड़चनें

बिजली विभाग में काफी समय से नियमित कर्मियों की कमी चल रही है। इस कारण विद्युत उपकेंद्रों से लेकर कार्यालय तक संविदा पर कर्मी कार्य कर रहे हैं। यदि नियमित कर्मी पर्याप्त हो तो बिजली सिस्टम को सही तरीके से दुरुस्त किया जा सके। निगम स्तर से टोल फ्री नंबर 1912 जारी किया गया है। प्रतिदिन विद्युत संबंधी 200 शिकायतें हर रोज पहुंचती है। यदि सिस्टम दुरुस्त होगा तो बिजली शिकायतों में भी कमी आएगी।

कनेक्शनधारकों को मीटर का रहता है इंतजार
बिजली विभाग द्वारा नए नलकूप कनेक्शनों के साथ मीटर लगाकर दिए जा रहे हैं। जिले में करीब 19 हजार उपभोक्ता ऐसे हैं। इनके यहां नलकूप पर मीटर लगाया जाना है। इस मीटर से खपत का आंकलन किया जाएगा। हालांकि किसानों से आधा बिल ही लिया जाएगा। अभी तक चार हजार के करीब मीटर लगे हैं। विभाग में पर्याप्त मात्रा में मीटर नहीं है। इस कारण मीटर लगाने की योजना भी लटकी हुई है। घरेलू उपभोक्ताओं के यहां भी मीटर के चलते कनेक्शन में देरी हो रही है।

बिजली की लाइन जर्जर हो गई हैं। इस कारण आए-दिन लाइनों में फॉल्ट होते हैं। काफी देर बिजली गुल होना आम बात हो गई है। इस कारण कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। विभाग को इस पर ध्यान देना चाहिए। -जाकिर उपभोक्ता
बिजली विभाग को बिल लेने की तो याद रहती है। हकीकत यह है कि बिजली हर रोज कभी दिन में कभी रात में गुल होती है। सुबह तो हर रोज दो घंटे गायब हो रही है। इस कारण दिनचर्या प्रभावित हो रही है।
-खालिद उपभोक्ता
बिजली के खंभे जगह-जगह जर्जर हालत में हैं। इनके गिरने का डर सताता रहता है। आए-दिन ओवरलोडिंग के चलते बिजली गुल होना आम बात हो गई है। विभाग चेकिंग अलावा किसी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। -आसिफ उपभोक्ता
बिजली की लाइनों को बदलन व जर्जर खंभों को बदलने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली मिल सके। रिवेंम्प स्कीम में री टेंडरिंग की प्रक्रिया चल रही है। जल्द काम की शुरुआत होगी।
-एमपी सिंह, अधीक्षण अभियंता
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