न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम प्रथम ने डेढ़ साल की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले वाले उसके मामा को उम्रकैद और अर्थदंड की सजा सुनाई है। वह अपनी डेढ़ साल की भांजी को गोद में खिलाने के बहाने ले गया था। अर्थदंड के कुल एक लाख रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे। अर्थदंड न देने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। उल्लेखनीय है कि घटना होने के महज 36 दिनों के भीतर न्यायालय ने यह फैसला सुनाया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार चंदपा क्षेत्र के एक गांव में दो जनवरी 2021 को शाम सात बजे आरोपी वीरेंद्र अपनी डेढ़ साल की भांजी को खिलाने के बहाने अपने साथ ले गया था। उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और वहां से भाग गया। पीड़ित बच्ची का डॉक्टरी परीक्षण भी कराया गया। इस मामले का मुकदमा दर्ज कर विवेचना अधिकारी ने विवेचना की।
इसके बाद 14 जनवरी को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) प्रथम प्रतिभा सक्सेना के न्यायालय में हुई। इसमें एडीजीसी राजपाल सिंह दिशवार ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी वीरेंद्र को दोषी मानते हुए धारा-376 (2) (च) भा.दं.सं. के तहत सश्रम आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही धारा-5/6 यौन अपराध शिशु संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत भी आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अर्थदंड की कुल धनराशि एक लाख रुपये पीड़िता को देने के आदेश भी कोर्ट ने दिए हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी राजपाल सिंह दिशवार ने पैरवी की ।
... तो कोई भी मां अपनी बच्ची अपने भाई की गोद में नहीं देगी
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि यदि अभियुक्त के साथ उदारता का दृष्टिकोण अपनाया गया तो समाज में अपराध और अराजकता की भावना प्रबल होगी। इससे बच्चियों का समाज में निर्भय होकर रहना दुश्कर हो जाएगा। संभवत: कोई भी मां अपनी अबोध बच्ची को गोद में खिलाने के लिए अपने भाई को नहीं देेगी। अभियुक्त का अपराध समाज विरोधी कृत्य है। पीड़िता की उम्र मात्र डेढ़ साल की है। जिसे अपने साथ किसी भी कृत्य के परिणाम और प्रकृति की भी जानकारी नहीं है। उसने अपने प्राकृतिक जीवन को भली भांति जीना भी शुरू नहीं किया है।