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हाथरस : निजी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों की पढ़ाई पर संकट

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घनश्याम सिंह, हाथरस। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत जिले के निजी स्कूलों में नि:शुल्क पढ़ाई कर रहे बच्चों की आगे की पढ़ाई पर संकट गहरा गया है। वर्ष 2019-20 से इन स्कूलों को शासन ने शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं किया है।
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वित्तीय वर्ष समाप्त होने के वक्त विभाग को केवल 07,10,774 रुपये का ही बजट मिला है, जबकि शासन को 1,68,88115 रुपये की मांग भेजी गई थी। ऐसे में आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले बच्चों अभिभावक भी काफी चिंता में हैं।
आरटीई के अंतर्गत अलाभित समूह और दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश दिलाने का प्रावधान है। स्कूलों में यह सीमा 25 फीसदी तक निर्धारित की गई है। जिले के 3869 से अधिक बच्चे आरटीई के अंतर्गत 158 प्राइवेट स्कूलों में नि:शुल्क पढ़ रहे हैं। अभिभावकों को स्कूलों को कोई फीस नहीं देनी होती बल्कि सरकार की ओर से उन्हें बच्चे की पढ़ाई के खर्च के लिए पांच हजार रुपये वार्षिक देने का भी प्रावधान है।
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1.68 करोड़ रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति की भेजी गई थी मांग
एक आकलन के अनुसार जिले में ही करीब एक करोड़ 68 लाख से अधिक की शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि बेसिक शिक्षा विभाग पर बकाया है। जिसे लेकर निजी स्कूल संचालक कई बार विभाग से मांग कर चुके हैं। वहीं अभिभावकों को भी इसके बारे में स्कूल संचालक लगातार बता रहे हैं। बच्चों की बकाया शुल्क प्रतिपूर्ति स्कूलों को दिलाए जाने की मांग प्राइवेट स्कूल संघ भी कर रहे हैं। शासन को भेजी गई मांग के सापेक्ष मात्र 07,10774 रुपए ही विभाग को एनवक्त पर मिले हैं।
केवल 333 बच्चों की फीस का ही होगा भुगतान
शासन से प्राप्त शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि का विभाग द्वारा केवल 65 स्कूलों को 333 बच्चों की धनराशि का भुगतान किया जाएगा। ऐसे में उन बच्चों के सामने सबसे ज्यादा संकट पैदा हो गया है, जिनकी शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि दो साल की बकाया है।
कोरोना के कारण बिगड़ गई है स्थिति
कोरोना काल के दौरान प्राइवेट स्कूलों की आर्थिक स्थिति पहले ही खराब हो चुकी है। कुछ अभिभावकों द्वारा दी गई जानकारी की अगर बात करें तो स्कूल संचालक यह कह रहे हैं कि यदि जल्द ही शुल्क प्रतिपूर्ति स्कूलों को नहीं मिली तो नए सत्र से आरटीई से चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं देंगे और जो बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं, उन्हें भी निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
- स्कूलों की शुल्क प्रतिपूर्ति के मद में एक करोड़ 68 लाख 88115 रुपये की मांग विभाग से की गई थी। जिसके सापेक्ष प्रतिपूर्ति की राशि सात लाख 10774 रुपये की प्राप्त हुई है, जिसका भुगतान किया जा रहा है। शेष शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि प्राप्त होते ही स्कूलों को आवंटित कर दी जाएगी।
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- शाहीन, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हाथरस।
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