न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
न्यायालय ने पत्नी की हत्या के आरोपी एक पति को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार चंद्रपाल सिंह पुत्र केदारी सिंह निवासी पीपरी थाना सकरौली जिला एटा की बहन कुसुमा देवी की शादी उदयवीर पुत्र भरत सिंह निवासी छौंक थाना हाथरस जंक्शन के साथ 12 जून 2003 को हुई थी। शादी में सामर्थ्य के अनुसार दहेज भी दिया था। इसके बाद उदयवीर जुआ और शराब का आदी हो गया। विरोध करने पर वह अपनी पत्नी के साथ मारपीट करने लगा। उदयवीर के अलावा उदयवीर की मां सावित्री, भाई राकेश व सोनू भी कुसुमा देवी साथ जमकर मारपीट करते थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 24 जून 2015 को कुसुमा देवी के परिजनों पर यह कॉल आई कि कुसुमा की घर पर मौत हो गई है। उसका भाई चंद्रपाल वहां गया तो उसने देखा कि कुसुमा की लाश जमीन पर पड़ी है। उसने इस मामले में अपने बहनोई और बहनोई के भाई व मां-बाप के खिलाफ शिकायत दर्ज करते हुए मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए विवेचना शुरू कर दी और आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया।
मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश-एफटीसी प्रथम सत्येंद्र सिंह वीरवान के न्यायालय में हुई। न्यायालय ने आरोपी राकेश, सोनू व रावित्री को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। मृत कुसुमा देवी के पति उदयवीर को उसकी हत्या का दोषी मानते हुए धारा 302 आईपीसी में उसे आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी मुकेश कुमार ने पैरवी की।