न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना काल ने हींग की खूशबू को भी फीका कर दिया है। कोरोना काल में अधिकांश फैक्टरियों पर ताले लटके हुए हैं। कारोबारियों को पुराना बकाया भी नहीं मिल पाया है। इसे लेकर हींग कारोबारी खासे परेशान हैं। फैक्टरियां बंद होने से श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है।
उल्लेखनीय है कि हाथरस में हींग की 50 बड़ी फैक्टरियों के अलावा करीब 100 छोटी हींग की फैक्टरियां हैं। इन फैक्टरियों में छह से आठ हजार श्रमिक कार्य करते हैं। प्रदेश में वन डिस्ट्रिक वन प्रोजेक्ट में हाथरस को पहचान दिलाने वाली हींग का उत्पादन भी यहां प्रभावित हुआ है। कर्फ्यू के चलते अधिकांश फैक्टरियां बंद पड़ी हैं। हींग तैयार करने के लिए कच्चा माल बाहर से आता है।
अब माल की आवक नहीं हो पा रही है। इस कारण हींग फैक्टरियाें पर ताले लटके हैं, जिससे हींग कारोबार को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। कुछ कारोबारी तो अब दूसरा काम शुरू करने की तैयारी में जुट गए हैं। अब तो कारोबारियों की बीते साल अनलॉक में दिए गए माल की बकाया राशि आने की आस भी टूट रही है। इसे लेकर कारोबारी खासे परेशान हैं। श्रमिक भी अन्य काम की तलाश करने की तैयारी में है।
कोरोना कर्फ्यू के चलते फैक्टरी बंद पड़ी है। संक्रमण के डर से श्रमिक भी कार्य करने नहीं आ रहे हैं। इस कारण हींग कारोबार को काफी नुकसान हो रहा है। अब सरकार हींग कारोबार को आर्थिक संजीवनी दे, तब कामकाज रफ्तार पकड़ेगा।
-मनोज अग्रवाल, हींग कारोबारी।
पिछले साल भी फैक्टरी काफी समय बंद रही थी। अब फिर से कोरोना के चलते श्रमिक काम करने से डर रहे हैं। इस कारण फैक्टरी बंद करनी पड़ी है। जो माल बीते साल गया था, उसका भी अभी पूरा भुगतान नहीं हो पाया है। कारोबार पूरी तरह धराशायी हो गया है। -अनिल शर्मा, हींग कारोबारी।