हाथरस/ अलीगढ़। पूरे देश में छाए चंदपा प्रकरण ने कांग्रेस को भी जमीन पर बैठा दिया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बिटिया के परिजनों से मिलने के लिए घर के बंद कमरे में पहुंचे और कुछ देर बाद ही जमीन पर बैठ गए। एक परिजन उनके लिए कंबल लेकर आया लेकिन दोनों ने घर वालों के साथ आत्मीयता जताते हुए जमीन पर बैठ कर बातचीत करना उचित समझा। लगभग दस मिनट तक वह पालथी मार कर बैठे रहे।
इस दौरान परिजनों को पहचानने के लिए टार्च का इस्तेमाल किया गया क्योंकि कमरे में अंधेरा होने से चेहरे आसानी से नहीं दिख रहे थे। कमरे में गर्मी और उमस भी बहुत थी जिससे नेता पसीने में सराबोर हो गए, लेकिन वह पूरा मामला समझ कर ही वहां से उठे। परिजन उनकी मुलाकात से पूरी तरह संतुष्ट दिखे। परिजनों ने इसका जिक्र भी किया।
गौर हो कि कांग्रेस संगठन में शीर्ष स्तर पर उठापटक होने के बाद ये पहला मौका था, जब राहुल गांधी के तेवर बहुत तल्ख थे। उन्होंने सीधे यूपी की योगी सरकार को आड़े हाथ लिया। चुनौती तक दे डाली कि दुनिया की कोई ताकत उनको कहीं जाने से रोक नहीं सकती है। राहुल यहां मंजे हुए नेता की तरह नजर आए। उन्होंने अपने आत्मविश्वास से कांग्रेस के अंदर एक उम्मीद जगाई। संगठन को मजबूती से जनता के साथ खड़े रहने का संदेश दिया। प्रियंका के साथ होने से संदेश और स्पष्ट था।
चंदपा में अनुसूचित जाति की बिटिया से सामूहिक दुष्कर्म और रात ढाई बजे शव जबरन जलाए जाने का मुद्दा देश भर में छाया है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व भी भविष्य की राजनीति को देखते हुए इस मामले में इंसाफ की लड़ाई में खुलकर आगे आया है। पूर्व में अनुसूचित जाति, जनजाति की राजनीति में कांग्रेस अगुवा थी, लेकिन बाद में यूपी में ये दौर बदला और कांग्रेस इनसे दूर होती गई। अब राहुल प्रियंका की जोड़ी दूरियों को पाटने में लग गए हैं क्योंकि प्रदेश में अनुसूचित जाति और जनजाति का बड़ा वोट बैंक है, जो किसी भी दल के लिए एक बड़ी ताकत बन सकता है। इसलिए कांग्रेस ने इस मामले में कड़े तेवर दिखा कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं।