समय के साथ रंग-गुलाल का कारोबार भी बदला है। अब होली का पर्व को सामूहिक रूप से मनाए जाने के चलते कई नए-नए उत्पादों की मांग बढ़ी है। इनमें मुख्य रूप से गुलाल के सिलिंडरों की मांग सबसे अधिक है। पांच किलो से लेकर 20 किलो गुलाल वाले सिलिंडर हाथरस में तैयार हो रहे हैं। इसके अलावा गुलाल स्प्रे भी तैयार किए जा रहे हैं। रंगीन धुंए वाले पटाखों की भी ट्रेडिंग की जा रही है, लेकिन यह धुंआ नुकसानदायक होने के चलते इसकी मांग कम है।
गुजरात से आए पक्के रंगों से तैयार होते हैं होली के रंग
जनपद के रंग कारोबारी गुजरात से पक्के रंग मंगवाते हैं। इन रंगों को यहां रिड्यूज किया जाता है। फ्लेवर, क्वालिटी के हिसाब से इन्हें अलग-अलग प्रकार के रंगों में बदला जाता है। अलग-अलग तरह की पॉलिश की जाती है। इसके बाद गुणवत्ता के हिसाब से सूखे, गीले रंग के साथ स्प्रे आदि तैयार किए जाते हैं।
कई तरह के गुलाल का होता है उत्पादन
जनपद में कई रंगों के गुलाल शामिल होते हैं। सबसे अधिक हर्बल रंग बिकते हैं। फ्लावर बेस, फ्रूट बेस, स्टॉर्च, प्रीमियम आदि हैं। कई कारोबारी अपनी अलग क्वालिटी तैयार करते हैं, जिन्हें बृजवासी, स्पर्श गोविंदा आदि कई प्रकार के नाम दिए जाते हैं। हर एक क्वालिटी में छह से दस तरह के रंगों वाला गुलाल बनता है।