न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
स्थायी लोक अदालत में वरिष्ठ नागरिकों को चिकित्सा सुविधाएं दिलाने के लिए दाखिल परिवाद में सीएमओ ने जवाब दाखिल कर दिया है। उन्होंने चिकित्सा को समाज सेवा ही नहीं, बल्कि परम धर्म मानते हुए व्यवस्थाओं को सुधारने का आश्वासन दिया है। मामले की सुनवाई के लिए अग्रिम तिथि 18 फरवरी नियत की गई है।
वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश कुमार शर्मा ने वरिष्ठ नागरिकोें को चिकित्सा सुविधा दिलाने के सिलसिले में स्थायी लोक अदालत में एक परिवाद दाखिल किया था। इस पर सीएमओ की ओर से न्यायालय में जवाब दाखिल किया गया हैं। यह जवाब उनकी ओर से डीजीसी रेवेन्यू पवन तोमर ने दाखिल किया। उन्होंने कहा है कि वरिष्ठ नागरिक रोगियों को औषधि वितरण के लिए अलग से काउंटर संचालित हैं। ओपीडी में हड्डी रोग और ईएनटी सर्जन आदि विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को प्राथमिकता के तौर पर चिकित्सा सुविधा अलग से दी जा रही है। उन्होंने लिखा है कि सीएमओ के अधीनस्थ सात सीएचसी हैं। इन पर 62 चिकित्सक हैं और 25 पीएचसी हैं, वहां 25 चिकित्सक हैं। जो विभिन्न विकास खंडों व ग्रामीण अंचल में तैनात हैं।
जिला अस्पताल में उपलब्ध टेस्ट, जांच के संबंध में प्रयोगशाला के आगे साइन बोर्ड लगाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने लिखा है कि बागला चिकित्सालय में कार्डियो तथा शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में चिकित्सक उपलब्ध न होने के कारण व मेडिकल कॉलेज के स्वरूप न उपलब्ध होने के कारण गंभीर बीमारियों एवं शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में वृद्धजनों को वार्ड में रखना उनके जीवन से खिलवाड़ करना है, इसलिए यहां से गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। जवाब में उन्होंने यह भी कहा है कि सभ्य समाज में चिकित्सक का स्थान विशेष परिस्थितियों में जीवनदाता का होता है। इस सिद्धांत पर कायम रहते हुए उपलब्ध संसाधनों का सही व पर्याप्त उपभोग का अनुसरण करते हुए व्यवहार में आने वाली त्रुटियों व कमियों के सुधार के संबंध में अधीनस्थों को निर्देशित कर दिया गया है। संवाद