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हाथरस: 38 साल से लंबित है एक कथित एनकाउंटर का मामला, 15 पुलिसकर्मी हैं आरोपित

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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भरतपुर के राजा मान सिंह के फर्जी एनकाउंटर के मामले में न्यायालय ने 35 साल बाद पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई है, लेकिन यहां न्यायालय में 38 साल पुराना एक एनकाउंटर लंबित है। इसमें 15 पुलिसकर्मी आरोपित हैं, लेकिन अभी तक मामले मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसमें सीबीसीआईडी 15 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध चार्जशीट भी लगा चुकी है।
भरतपुर के राजा मान सिंह के बहुचर्चित मामले में मथुरा कोर्ट ने 11 पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई है। यह फैसला 35 साल बाद आया है। एक कथित एनकाउंटर का मामला यहां कोर्ट में लंबित है। 15 जनवरी 1983 को एटा की कचहरी से दिनदहाड़ेे कुछ पुलिसकर्मी एक वकील मनवीर सिंह के बिस्तर से एक ग्रामीण हीरालाल पुत्र बलवंत निवासी महमूदपुर थाना सिकंदराराऊ को पकड़ कर ले गए। उसे कई दिन तक सिकंदराराऊ और फिर चंदपा थाने में हिरासत में रखा। उसके बाद 5 फरवरी 1983 को उसे कथित मुठभेड़ में चंदपा के गांव नगला ओझा में पुलिस ने मार गिराया था।
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पुलिस की इस कथित मुठभेड़ पर काफी सवालात हुए। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच भी हुई। इस मामले में शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता रायवीर सिंह एडवोकेट ने पैरवी की। उनकी तहरीर के बाद 10 जनवरी 1987 को चंदपा के तत्कालीन एसओ आरके त्यागी सहित सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा कायम हुआ। इसके बाद मामले की जांच अपराध अनुसंधान शाखा ने की तो विवेचना में यह पाया कि यह मुठभेड़ नहीं थी बल्कि इस ग्रामीण को एटा कचहरी से उठाया था और उसकी हत्या कर दी गई थी।
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यही नहीं जांच में कुछ अन्य पुलिसकर्मियों के नाम भी सामने आए। इस पूरे मामले में 1996 में 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। इसमें सात दरोगा अनिल कुमार शर्मा, केएम उपाध्याय, केवल सिंह, धर्म सिंह, आरके त्यागी, हरीशचंद्र विद्यार्थी, बीडी दुबे के अलावा बहादुर खां, रूपराम, हरीशचंद, राजवीर सिंह, रामवीर सिंह, श्याम सिंह, धनपाल सिंह, एसपी शर्मा को आरोपित किया गया था। 38 साल में यह मामला कोर्ट में लंबित है। पांच पुलिसकर्मी अभी भी तारीख पर नहीं आ रहे और एक की मौत हो चुकी है। जिन पुलिसकर्मियों के वारंट जारी हैं, उनके हाजिर नहीं होने पर कोर्ट से कई बार डीजीपी को पत्र भी भेजा जा चुका है।
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