न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
विधानसभा चुनाव के लिए बसपा ने क्षत्रिय चेहरे पर दांव लगाकर विपक्ष खासकर भाजपा के सामने चुनौती पेश कर दी है। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में भाजपा के टिकट पर क्षत्रिय समाज के ही वीरेंद्र सिंह राना चुनाव जीत थे। बसपा के इस दांव के बाद अब भाजपा के सामने जातीय संतुलन साधने की बड़ी चुनौती होगी। यही नहीं सपा में भी टिकट के लिए क्षत्रिय समाज के नेताओं की लंबी कतार है। ऐसे में अगर यह दोनों पार्टियां भी इस जाति के उम्मीदवार पर दांव लगाती हैं तो क्षत्रिय वोटों में बिखरा की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल भाजपा और सपा दोनों के सामने प्रत्याशी तय करते समय क्षत्रियों के वोटों में बिखराव रोकने की चुनौती होगी।
अतीत नजर डालें तो पता चलता है कि क्षेत्र से तीन बार क्षत्रिय प्रत्याशी भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। दो बार पूर्व विधायक यशपाल सिंह चौहान और वर्तमान विधायक वीरेंद्र सिंह राना ने भाजपा को जिताया है। देखा जाए तो यशपाल के सामने क्षत्रिय प्रत्याशी के रूप में सुरेश प्रताप गांधी रहे हैं। पिछली बार भाजपा से वीरेंद्र सिंह राना चुनाव में उतरे थे, जबकि उनके सामने सपा से यशपाल सिंह चौहान थे, लेकिन जीत राना के हाथ लगी।
इस बार बसपा ने तो अपने पत्ते खोलकर क्षत्रिय उम्मीदवार के रूप में इत्र कारोबारी अवधेश कुमार सिंह पर दांव लगा दिया है, लेकिन भाजपा के सामने सवाल यह है कि बसपा की काट के लिए क्या वह भी क्षत्रिय चेहरे को आजमाएगी या फिर किसी और जाति के उम्मीदवार पर दांव खेलेगी। यही सवाल सपा प्रत्याशी को लेकर भी क्षेत्र के राजनीतिक विश्लेषकों के जेहन में उठ रहा है। सवाल यही है कि क्या सपा भी क्षत्रिय चेहरे पर दांव खेलेगी या फिर किसी और जाति के प्रत्याशी को मैदान में उतारेगी।