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हाथरस : 1996 के बाद से सादाबाद में भाजपा नहीं जीती, इस बार रामवीर से उम्मीद

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसमें सबसे आगे भाजपा है। भाजपा जिले में दो विधानसभा सीटों पर काबिज है। मोदी लहर में भी पिछली बार भाजपा सादाबाद की सीट नहीं जीत पाई थी। भाजपा इस प्रयास में है कि इस बाद जिले की तीनों सीटों पर जीत हासिल की जाए। इसी हिसाब से पार्टी ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
बात यदि हाथरस विधानसभा सीट की करें तो इस सीट पर भाजपा अभी तक दो बार ही जीत हासिल कर सकी है। वर्ष 1993 में भाजपा के राजवीर सिंह पहलवान ने सपा-बसपा के संयुक्त प्रत्याशी हिलाल अहमद कुरैशी को कांटे के मुकाबले में हराया था। उसके बाद भाजपा या उसके समर्थित प्रत्याशी मुख्य मुकाबले में तो रहे, लेकिन वह जीत हासिल नहीं कर सके। भाजपा का यह सूखा पिछले वर्ष 2017 के चुनाव में हरीशंकर माहौर ने समाप्त किया। उन्होंने करीब 70 हजार वोटों से बसपा प्रत्याशी बृजमोहन राही को परास्त किया।
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सादाबाद सीट का इतिहास देखें तो भाजपा ने यहां वर्ष 1991 में पहली बार जीत हासिल की। तब भाजपा के चौ. बिजेंद्र सिंह इस सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद वर्ष 1996 में इस सीट से भाजपा से चौ. विशंभर सिंह विधायक निर्वाचित हुए। तब से भाजपा इस सीट को नहीं जीत सकी है। जिले में सिकंदराराऊ विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा भाजपा ने अपना परचम लहराया है। वर्ष 1996 में यहां से भाजपा के यशपाल सिंह चौहान जीते। उसके बाद फिर वह वर्ष 2007 में भाजपा से ही चुनाव जीते।
वर्ष 2017 में भाजपा के वीरेंद्र सिंह राना ने यह चुनाव जीता। ऐसे में वर्ष 2017 में जब पूरे प्रदेश में भाजपा की प्रचंड लहर चल रही थी, तब भाजपा ने हाथरस सदर और सिकंदराराऊ की सीट तो आसानी से जीत लीं, लेकिन सादाबाद की सीट पर वह करिश्मा नहीं दिखा सकी। वहां भाजपा प्रत्याशी मुख्य मुकाबले में भी नहीं रहा। उसे चौथे स्थान पर संतोष करना पड़ा। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने विपरीत परिस्थितियों में विजयश्री हासिल कर ली। पूरे अलीगढ़ मंडल में सादाबाद सीट पर ही भाजपा सीट का स्वागत नहीं चख सकी।
अब पार्टी ने जीत के लिए रणनीति शुरू कर दी है और उसका सबसे ज्यादा ध्यान सादाबाद विधानसभा सीट पर है। इसी रणनीति के तहत रामवीर उपाध्याय के पूरे परिवार को भाजपा अपने पाले में शामिल कर चुकी है। हालांकि रामवीर उपाध्याय अभी बसपा से निलंबित चल रहे हैं और भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं। भाजपा की यह कोशिश है कि इस बार जिले की सादाबाद सहित तीनों सीटें जीती जाएं। सादाबाद में भाजपा को वर्ष 1996 के बाद जीत हासिल नहीं हुई है। संवाद
भारतीय जनसंघ से जीते थे रामसरन सिंह
हाथरस। भाजपा तो वर्ष 1980 में अस्तित्व में आई, लेकिन उससे पहले वर्ष 1967 में कुं. रामसरन सिंह ने भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में हाथरस सदर सीट से जीत हासिल की थी। भारतीय जनसंघ ही आगे चलकर भाजपा के रूप में अस्तित्व में आई।
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पार्टी पूरे दमखम से विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। सादाबाद सहित जिले की तीनों सीटों पर पार्टी इस बार जीत हासिल करेगी। आलाकमान ही प्रत्याशी तय करेगा।
-गौरव आर्य, जिलाध्यक्ष भाजपा
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