न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के बिटिया के घर रात में रुकने और फिर कलेक्ट्रेट जाकर जिलाधिकारी (डीएम) से वार्ता करने के कारण बहुचर्चित बिटिया प्रकरण फिर सुर्खियों में आ गया। चंद्रशेखर पूरी रात बिटिया के घर पर रुके और प्रशासन इसे लेकर खासा तनाव में रहा कि कहीं कोई बवाल न हो जाए। पूरा गांव और आसपास का इलाका छावनी में तब्दील रहा। भीम आर्मी के प्रमुख जब डीएम से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंचे तो वहां भी काफी भीम आर्मी के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं का जमावाड़ा लग गया। कलेक्ट्रेट में भी काफी पुलिस और पीएसी मौजूद रही। बाद में जब डीएम और एसपी से मिलकर चंद्रशेखर दोपहर बाद जिले से चले गए, तब प्रशासन ने राहत की सांस ली।
तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद बृहस्पतिवार की देर शाम बिटिया के घर पहुंचे थे। उनके काफी समर्थक भी उनके साथ थे, लेकिन प्रशासन ने चंद लोगों को ही चंद्रशेखर के साथ बिटिया के घर जाने की इजाजत दी। प्रशासन को उम्मीद थी कि थोड़ी देर मुलाकात के बाद चंद्रशेखर यहां से चले जाएंगे, लेकिन रात्रि में चंद्रशेखर ने यह घोषणा कर दी कि वह अब बिटिया के घर ही रात्रि में रुकेंगे। इससे प्रशासन में खलबली मच गई।
बिटिया का परिवार सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लंबे समय से सीआरपीएफ की सुरक्षा में रह रहा है। चंद्रशेखर ने यह ऐलान भी कर दिया था कि बिटिया के परिवार को अभी तक न्याय नहीं मिला है। एक साल बाद भी परिवार के किसी सदस्य को ना तो सरकारी नौकरी मिली है और ही आवास दिया गया है।
ऐसे में वह शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पर धरना देंगे। बिटिया के घर के सामने लगे गंदगी के ढेर पर भी उन्होंने काफी नाराजगी जताई थी। उनकी इस घोषणा से अधिकारी तनाव में आ गए। मध्य रात्रि तक यह प्रयास होते रहे कि चंद्रशेखर गांव से ही वापस लौट जाएं और कलेक्ट्रेट न जाएं, लेकिन भीम आर्मी प्रमुख ने स्पष्ट कह दिया कि वह कलेक्ट्रेट जरूर जाएंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कलेक्ट्रेट पहुंचने के लिए कह दिया। पूरी रात प्रशासनिक अधिकारी गांव में डेरा जमाए रहे और वहां काफी पुलिस बल भी रही।
सुबह करीब 11 बजे चंद्रशेखर बिटिया के घर से कलेक्ट्रेट के लिए निकले। इस दौरान भी उनके साथ काफी पुलिस बल रहा। इधर, कलेक्ट्रेट में भीम आर्मी के काफी कार्यकर्ता एकत्रित हो गए। चंद्रशेखर ने कार्यकर्ताओं को संबोधित भी किया और योगी सरकार पर तीखे आरोप लगाए। तदुपरांत वह डीएम से मिलकर यहां से अपन काफिले के साथ चले गए। जब चंद्रशेखर चले गए तब प्रशासन ने चैन की सांस ली। संवाद