न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में संचालित कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) की करीब 600 आईडी को काम नहीं करने की स्थिति में बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। जुलाई में अब तक करीब 50 आईडी को बंद कर दिया गया है। वहीं सीएससी पर सभी ऑनलाइन सेवाओं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, अन्यथा आईडी को बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए और ग्रामीण क्षेत्र में उद्यमिता पर जोर देने, आधार कार्ड, पेन कार्ड, बैंकिंग सुविधा, हर तरह की ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध करवाने की खातिर गांवों में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) बनाए गए हैं, ताकि ग्रामीणों को शहर में ऑनलाइन सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़े। लोगों को घर के पास ही सभी तरह की सुविधा उपलब्ध हो जाएं। जिले में 1200 कॉमन सर्विस सेंटर खोले गए हैं, लेकिन इनमें से 600 सेंटरों के संचालक अपनी आईडी से काम नहीं कर रहे।
इन आईडी से किसी तरह की ट्रांजेक्शन नहीं की है। इस कारण जुलाई माह से इनकी आइडी बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। सीएससी ग्रामीण स्तर पर महीने में कम से कम 50 ट्रांजेक्शन, शहर के सीएससी द्वारा कम से कम 100 ट्रांजेक्शन करने अनिवार्य हैं। सीएससी द्वारा दी जा रही सभी सेवाओं में पंजीकरण करना अनिवार्य किया गया है। जिला प्रबंधक प्रदीप सिंह ने बताया कि 600 आईडी ऐसी हैं, जो पिछले एक साल से संचालित नहीं हैं। इस कारण इन आईडी को बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रबंधक प्रदीप कुमार ने बताया कि जो भी वीएलई वर्किंग टाइम में लोगों के काम करने से मना करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उसकी आईडी भी तुरंत प्रभाव से डि-एक्टिवेट कर दी जाएगी।
जीवन प्रमाण-पत्र जमा करवाने के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर
जिन रिटायर्ड कर्मचारियों को हर साल अपना जीवन प्रमाण पत्र देने के लिए ट्रेजरी या बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वह अब अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर अपना जीवन प्रमाण पत्र ऑनलाइन जमा करवा सकते हैं। जिला समन्वयक अवनीश कुमार ने बताया कि साल में एक बार बुजुर्गों को अपना जीवन प्रमाण पत्र देना पड़ता है। पहले साल एक बार ही यह मौका था, लेकिन अब किसी भी महीने बुजुर्ग जाकर यह ऑनलाइन करवा सकते हैं।
सीएससी जिला प्रबंधक को आदेशित किया गया है कि ऐसे सेंटरों की सूची उपलब्ध कराई जाए। जहां सीएससी से सेवाएं नहीं दी जा रही हैं। ऐसी आईडी को जल्द निष्क्रिय किया जाएगा और उनकी जगह नए वीएलई बनाए जाएंगे।
-आलोक माहेश्वरी, डीआईओ एनआईसी।