लॉकडाउन के बाद से आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों का आना बंद है। तैयार भोजन के बदले बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को सूखा राशन घर पर दे दिया जाता है। नवंबर के बाद से फ्री अनाज नहीं आया है। - कल्पना शर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
लॉकडाउन में रोजगार ठप होने से मजदूर वर्ग को काफी परेशानी उठानी पड़ी। मनरेगा के तहत गांव में रोजगार देने की कोशिश की। गांव की आबादी 1057 और मतदाताओं की संख्या 940 है। इस आंकड़े से आप सर्वे की विश्वसनीयता का अंदाजा लगा सकते हैं। कर्मचारी घर बैठे सर्वे कर लेते हैं। सही तस्वीर सामने नहीं आती। - मदन मोहन शर्मा उर्फ मदन फौजी, प्रधान
लॉकडाउन के दौरान अप्रैल से अगस्त 2020 तक पोषण पुनर्वास केंद्र में कोई भी बच्चा भर्ती नहीं हुआ। यहां के कर्मचारियों की ड्यूटी अन्य जगहों पर लगी थी। कुछ समय के लिए केंद्र को क्वारंटीन सेंटर में तब्दील कर दिया गया था। अभी आठ बच्चे केंद्र में भर्ती हैं। - पारुल, डाइटिशियन, पोषण पुनर्वास केंद्र हाथरस
विडंबना है कि हाथरस जनपद में 2732 बच्चे लाल श्रेणी में हैं और पोषण पुनर्वास केंद्र खाली रहता है। यह हमेशा भरा रहना चाहिए। किसी तरह के बहाने से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अभिभावकों के पास जाएं और उन्हें जागरूक करें। अभिभावकों को बताएं कि समय पर उपचार नहीं मिलने से बच्चों के जीवन पर किस तरह का असर पड़ेगा। समझाकर एनआरसी में बच्चों को लाया जा सकता है। कुपोषण से लड़ने के लिए अलग विभाग है। जन जागरूकता एवं जन सहयोग बेहद जरूरी है। - डॉ. वीके सिंह, संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, अलीगढ़ मंडल
| लाल श्रेणी के बच्चे | 2732 |
| पीली श्रेणी के बच्चे | 16800 |
| हरी श्रेणी के बच्चे | 131373 |
| 3 से 6 वर्ष के बच्चे | 34 |
| 7 माह से 3 वर्ष के बच्चे | 64 |
| 0 से 6 माह के बच्चे | 12 |
| अति कुपोषित | 03 |
| कुपोषित | 09 |
| गर्भवती महिलाएं | 08 |
| गांव की आबादी | 1057 (2011 की जनगणना) |