सिकंदराराऊ। कोरोना का असर त्योहारों पर साफ दिखने लगा है। बकरीद पर पहले जहां महीनों पहले से पशु पैंठ सजने लगता था वहीं अब क्षेत्र में इसका असर दिख रहा है। लॉकडाउन के कारण बाजार में खरीदार नदारद हैं। आधी कीमत पर भी बकरे के खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
बता दें कि बकरीद में बकरों की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी से महीनों पूर्व यहां बकरों की खरीद चालू हो जाती है। हाथरस रोड पर लगने वाली साप्ताहिक पशु पैंठ में बड़ी संख्या में बकरों की बिक्री होती रही है। व्यापारी महीनों पहले ही ट्रकों में भर कर बकरों को मुंबई दिल्ली आदि बड़े स्थानों पर बेच कर मुनाफा कमाते रहे हैं। लेकिन इस बार बकरीद कोरोना की भेंट चढ़ गया है। सामाजिक दूरी के उल्लंघन के चलते पशु पैंठ पर रोक लगी हुई है। हजारों की तादाद में किसान भी बकरों को बेचने के लिए पैंठ लाते थे। जिन तोताफरी, राजस्थानी बकरों की कीमत चालीस से पचास हजार तक होती है वे आज 20-25 हजार तक में बिक रहे हैं। पशुपालक व किसान औने-पौने दाम में बकरा बेचने को मजबूर हैं। पैंठ ठेकेदार साबिर हाफिज ने बताया एक तो कोरोना ने मार दिया ऊपर से पैंठ बंद होने से पूरा कारोबार चौपट हो गया।