आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से कई फसलें खराब हो गईं हैं। जिले में बृहस्पतिवार से रविवार के बीच लगातार मौसम बिगड़ने से तरबूज, खरबूज, हरी मिर्च, टमाटर, मूंग, गेहूं, ग्वार की फसलों को खासा नुकसान हुआ है। बाजरा और मक्का की फसलों को इल्ली (कीट) ने चट कर दिया। प्रकृति की दोहरी मार से अधिकांश फसलें खेतों में बिछ गईं हैं, बालियां खराब हो गईं हैं। खून-पसीना बहा कर फसलें उगाने वाले किसान अब बेबस और मायूस हैं।
सहपऊ कस्बा, गांव खोंडा और आसपास के दर्जनों गांवों में हरी-भरी गेहूं, मूंग, हरी मिर्च, टमाटर, ग्वार और तरबूज-खरबूज की फसलें ओलों की मार से जमीन पर बिछ गईं। आलू किसान पहले ही मंडियों में सही दाम न मिलने और कोल्ड स्टोरेज का भाड़ा तक न निकाल पाने के अवसाद से जूझ रहे थे, रही-सही कसर इस आंधी-बारिश ने पूरी कर दी। जो फसलें ओलों से बचीं, उन बाजरा और मक्का की फसलों को इल्ली (कीट) ने चट कर दिया।
पट्टे की जमीन और कर्ज का बोझ
सबसे ज्यादा वे परेशान हैं, जिन्होंने दूसरों से जमीन पट्टे (किराये) पर लेकर खेती की थी। किसान लोचन सिंह ने बताया कि उन्होंने 11,000 रुपये प्रति बीघा के हिसाब से 15 बीघा खेत किराये पर लिया था। उसमें तरबूज, खरबूज और मूंग बोई थी। आज उनकी पूरी लागत और मेहनत ओलों की भेंट चढ़ चुकी है।
इसी तरह विधिचंद्र ने 20 बीघा में टमाटर, हरी मिर्च और ग्वार की खेती की थी, जो अब पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। देवकी नंदन, ओंकार सिंह, नरेंद्र रावत और दिनेश शर्मा जैसे सैकड़ों ऐसे नाम हैं, जिनकी काशीफल, ज्वार और बाजरे की फसलें अब मलबे का ढेर बन चुकी हैं।
खेतों में पहुंचे डीएम अतुल वत्स
किसानों के दर्द को समझने के लिए सोमवार को डीएम अतुल वत्स ने प्रशासनिक टीम के साथ चंदपा के गांव संटीकरा व अनीगढ़ी का दौरा किया। उन्होंने खेतों में जाकर खुद फसलों के नुकसान का जायजा लिया और किसानों को ढांढस बंधाया। प्रभावित किसानों की आंखों में अब सिर्फ बेबसी और आंसू हैं। अपनी डूबी हुई पूंजी और बर्बाद हो रही फसल को देख रहे किसानों को अब सूबे की सरकार और स्थानीय प्रशासन से मदद की आस है।
आलू का तो मंडियों में भाव ही नहीं मिला, सोचा था बाजरे से भरपाई करूंगा। 53 बीघा बाजरा किया था, सब मिट्टी में मिल गया। तूफान और ओलों ने सब नष्ट कर दिया।
-रामवीर शर्मा, किसान (गांव सिखरा)
इस बार आंधी और ओलों ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा। आखिर कुदरत हमारे साथ इतना अन्याय क्यों कर रही है ? समझ नहीं आता कि परिवार कैसे पालेंगे।
-विवेक पचौरी, पीड़ित किसान
प्रभावित क्षेत्रों में टीमें भेजी जा रही है। राजस्व अधिकारियों को क्षति का सटीक आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों ने बताया है कि असमय बारिश व ओलावृष्टि से काफी नुकसान हुआ है। प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिलाया जाएगा।
अतुल वत्स, जिलाधिकारी।