पुलिसकर्मी ने बाइक सवार को रोका, पर नहीं रूका। पीछा करने पर पुलिस के ऊपर बाइक सवार ने फायरिंग की। उसके बाद मारपीट और जातिसूचक गालियां दी। कोर्ट ने चारों आरोपियों को चार-चार साल की सजा दी है।
हाथरस विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट न्यायालय ने अनुसूचित जाति के एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी से मारपीट करने और जातिसूचक गालियां देने के चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए चार साल की कैद और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार भीकम सिंह, जोकि यातायात पुलिस प्रकोष्ठ में मुंशी है, ने कोतवाली सदर में तहरीर दी कि छह जुलाई 2009 को शाम साढ़े छह बजे ट्रैफिक कार्यालय की डाक सीओ ट्रैफिक कार्यालय में देकर वापस आया था। प्रभारी यातायात से कार्यालय सबंधी कार्य की बातचीत करने के उद्देश्य से कार्य की बातचीत करने के लिए खड़ा था। अधिक भीड़ होने पर वह भीकम सिंह भी यातायात सुचारू कराने में सहयोग करने लगा। इसी समय एक इंडिका कार जिस पर नंबर नहीं था, जंक्शन रोड से ओवरटेक करके आई।
ट्रैफिक कांस्टेबल विनोद कुमार ने रोकने का संकेत दिया। इस पर कार सवार ने अपनी कार बीच चौराहे पर खड़ी कर दी। विनोद कुमार ने इस चालक से कार को पीछे करने को कहा। इसके बाद विनोद कुमार ट्रैफिक पास कराने लगा। इसी दौरान भीकम सिंह ने कार सवार से कार को पीछे करने को कहा। इस पर कार चालक वहां से धमकी देकर चला गया। उसके बाद आठ-दस लोग बाइकों से आए और आते ही मारपीट करने लगे। उसमें सीएमओ ऑफिस में काम करने वाला धर्मा भी था। इन्होंने जातिसूचक गालियां दी। यह लोग शराब पिए हुए थे।
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मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया। कोर्ट ने आरोपी धर्मा उर्फ धर्मवीर निवासी मानिकपुर, धर्मपाल शर्मा निवासी कानऊ थाना हसायन, राजेश शर्मा निवासी चंद्रा कॉलोनी, महौली रोड, मथुरा व राजू निवासी नवींपुर थाना कोतवाली हाथरस को दोषी मानते हुए चार-चार साल की कैद और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक दिनेश पाल सिंह ने की।