शहर में सर्दी के मौसम के साथ सजे बाहरी वूलन बाजारों पर अब राज्य जीएसटी विभाग की नजर है। हिमालयन, तिब्बती सहित अन्य राज्यों से आए कई वूलन कारोबारी बिना जीएसटी बिल के खुलेआम बिक्री कर रहे हैं। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि बाहरी व्यापारी अस्थायी तौर पर शहर में दुकानें लगाकर स्वेटर, कंबल, जैकेट, शॉल व अन्य ऊनी वस्तुओं की बिक्री कर रहे हैं, लेकिन अधिकतर दुकानों पर ग्राहकों को पक्का बिल नहीं दिया जा रहा। कई मामलों में केवल कच्ची पर्ची या मौखिक लेनदेन के जरिये बिक्री की जा रही है, जो सीधे तौर पर जीएसटी के नियमों का उल्लंघन है।
राज्य जीएसटी विभाग के अधिकारियों के अनुसार बाहर से आकर सीमित समय के लिए व्यापार करने वाले दुकानदारों को 90 दिन के लिए अस्थायी जीएसटी पंजीयन कराना अनिवार्य होता है। कई बाहरी कारोबारी बिना पंजीयन के ही कारोबार कर रहे हैं, जबकि कुछ ने पूर्व वर्षों में अस्थायी पंजीयन तो कराया था, लेकिन इस साल किसी ने भी अस्थायी पंजीयन नहीं लिया है।
अब विभाग ने ऐसे सभी बाहरी कारोबारियों की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है। जल्द ही नोटिस जारी कर उन्हें पंजीयन कराने और नियमों के तहत बिल जारी करने के निर्देश दिए जाएंगे। नियमों की अनदेखी करने पर जुर्माना और टैक्स वसूली की कार्रवाई भी की जा सकती है।
सहायक आयुक्त राज्य कर खंड दो हरिनाथ यादव का कहना है कि अस्थायी बाजार वालों द्वारा अस्थायी पंजीयन न लिए जाने की जानकारी मिली है। उनको नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने ग्राहकों से भी अपील की है कि वे ऊनी वस्त्र खरीदते समय पक्का बिल जरूर लें, ताकि टैक्स चोरी पर रोक लगाई जा सके और राजस्व की हानि न हो।