डिजिटल जनगणना अपने शुरुआती दौर में ही कई तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियों से प्रगणक जूझ रहे हैं। शनिवार को इस महाभियान का जायजा लिया तो सामने आया कि जीपीएस और टैबलेट के नक्शे प्रगणकों की राह आसान करने के बजाय उन्हें भटका रहे हैं। हालत यह है कि प्रगणकों की टीम को जाना कहीं और होता है, लेकिन जीपीएस कहीं और ले जा रहा है। पता पूछकर घर पहुंचे तो अनजान चेहरों को देख परिवार जानकारी देने से हिचक रहा है।
विद्यापति नगर (मुरसान गेट) टीम दोपहर तीन बजे
यहां प्रगणक सोनाली शर्मा अपनी ड्यूटी निभाती मिलीं। सुरक्षा और सहयोग के लिए उनके पति हेमंत कटारा भी उनके साथ चल रहे थे, हालांकि हेमंत की ड्यूटी किसी दूसरी जगह लगी है। सोनाली अपने टैबलेट में दिए गए मैप के सहारे घरों को ढूंढ रही थीं, लेकिन जीपीएस ने जागेश्वर की गली नंबर एक के बजाय नलवाली गली में पहुंचा दिया। लोगों से पता पूछकर सही मकान पर पहुंचीं और विजय देवी के मकान पर दस्तक दी। काफी देर तक खटखटाने के बाद दरवाजा खुला, प्रगणक ने मकान, संसाधन और परिवार के सदस्यों का ब्योरा मांगा, तो विजय देवी ने सीधा सवाल दाग दिया, क्या कोई नई स्कीम आई है? इसमें कुछ मिलेगा या नहीं? इस पूरी पूछताछ और शंकाओं के समाधान में करीब 20 मिनट का समय लग गया।
पुरानी यादें और 1985 की सीवरेज लाइन
इसके बाद टीम उमाशंकर शर्मा के घर पहुंची। बेटे की बहू ने अनजान लोगों को देख दरवाजा खोलने में हिचक दिखाई और बात अपने ससुर पर टाल दी। घर में घुसते ही बैठक में मौजूद उमाशंकर ने पूछताछ के बाद प्रगणकों को अंदर बैठाया। उन्होंने न सिर्फ सभी सवालों के जवाब दिए, बल्कि अपने क्षेत्र की 1985 की सीवरेज लाइन तक की दिलचस्प जानकारी भी साझा की। यहां प्रगणक को 15 मिनट का समय लगा।
सौभाग्य फार्म से मीतई पोखर तक
शहर के दूसरे हिस्से, आगरा मार्ग पर प्रगणक चित्रा स्वामी एक बिल्कुल अलग ही तकनीकी और व्यावहारिक समस्या से जूझ रही हैं। शनिवार को जब चित्रा ने अपने आवंटित क्षेत्र का भ्रमण किया, तो पाया कि वहां रिहायशी मकान न के बराबर हैं। पूरे इलाके में केवल फार्म हाउस, गेस्ट हाउस, बिजली घर, स्कूल और अन्य प्रतिष्ठान ही मौजूद हैं। डेटा फीडिंग में भी असमंजस इस क्षेत्र में केवल चुनिंदा मकान ही हैं जो नए बने हैं। ऐसे में प्रगणक भारी असमंजस में हैं कि उन्हें सिर्फ इन गिने-चुने आवासीय मकानों का ही डेटा फीड करना है, या फिर इन बड़े प्रतिष्ठानों के संचालन का पूरा डेटा भी एकत्रित करना है।
पति बाहर, जानकारी देने में हिचक रहीं महिलाएं
दोपहर के सन्नाटे में दस्तक और महिलाओं की हिचक सर्वेक्षण के दौरान सबसे बड़ी चुनौती घरेलू महिलाओं के बीच समन्वय बैठाने की आ रही है। दोपहर के समय जब घरों के पुरुष काम पर बाहर होते हैं, तब प्रगणकों की टीम अचानक दरवाजे पर दस्तक दे रही है। अनजान व्यक्ति को देखकर महिलाएं सकपका रही हैं और सुरक्षा के लिहाज से दरवाजा खोलने में संकोच कर रही हैं। असमंजस की स्थिति में महिलाएं बेहद सतर्कता बरत रही हैं। प्रगणकों द्वारा डेटा मांगे जाने पर वे कोई भी जानकारी देने से पहले अपने बेटों, पतियों या घर के अन्य जिम्मेदार पुरुषों को फोन लगा रही हैं। फोन पर पूरी बात बताने और वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही जरूरी डेटा उपलब्ध कराया जा रहा है।