दिवाली पर इस बार पटाखा बाजार में महंगाई का बम फूटेगा। इस साल पटाखों की कीमतों में 30 से लेकर 50 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बारूद, केमिकल की कीमतों में कई गुना उछाल, कच्चे माल की वैश्विक किल्लत और शिवकाशी से माल ढुलाई भाड़े में वृद्धि के कारण पटाखों के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।
हाथरस की पटाखा मंडी ब्रज क्षेत्र में प्रमुख स्थान रखती है। शहर के थोक कारोबारियों ने तमिलनाडु के शिवकाशी से पटाखों की खेप मंगाकर भंडारण पूरा कर लिया है और मंडी में थोक बिक्री शुरू हो चुकी है। हाथरस से सादाबाद, सासनी, सिकंदराराऊ सहित अलीगढ़, मथुरा, आगरा, एटा व कासगंज तक के खुदरा विक्रेता माल खरीदने पहुंच रहे हैं।
हालांकि दामों में उछाल से खुदरा व्यापारी सीमित बजट में कम स्टॉक ही ले पा रहे हैं। वहीं केवल प्रमाणित ग्रीन क्रैकर्स की अनिवार्यता से तेज आवाज और आसमानी आतिशबाजी की कई श्रेणियों का उत्पादन भी काफी सीमित रह गया है।
पटाखों के दामों में इस तरह हुआ इजाफा
-रसायनों के दामों में उछाल : पटाखा निर्माण के मुख्य घटक सल्फर, शोरा और एल्युमिनियम पाउडर महंगे हो गए हैं। सल्फर का 2,800 में मिलने वाला 50 किलो का बैग अब सीधे 10,000 तक पहुंच चुका है।
-युद्ध व आपूर्ति संकट : अंतरराष्ट्रीय युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव से शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे आयातित केमिकल्स की आपूर्ति पर असर पड़ा है।
-पैकिंग व मालभाड़ा : पैकिंग के कागज, डुप्लेक्स बोर्ड, सूत के साथ डीजल महंगा होने से शिवकाशी से हाथरस तक का लॉरी भाड़ा काफी बढ़ गया है।
-फैक्टरियों में सख्ती : सुरक्षा मानकों की कड़ी जांच से शिवकाशी में उत्पादन सीमित हुआ, जिससे मांग के सापेक्ष आपूर्ति घट गई।
शिवकाशी से ही माल 30 से 40 फीसदी महंगा आ रहा है। सल्फर के दाम चार गुना होने और भाड़ा बढ़ने से लागत बढ़ गई है। फुटकर दुकानदार बजट के चलते पहले से कम माल उठा रहे हैं।
-अनुभव अग्रवाल, थोक पटाखा विक्रेता, हाथरस।
हाथरस मंडी से हर साल दुकान के लिए माल ले जाते हैं, लेकिन इस बार हर आइटम पर रेट बढ़े हैं। पूंजी सीमित होने से दुकानों पर वैरायटी कम रख पा रहे हैं। त्योहार पर बढ़े दामों पर ग्राहकों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी।
विशाल चक, फुटकर पटाखा विक्रेता, हाथरस।