ओपीडी में आग के बाद बिजली आपूर्ति को जांचते कर्मी
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हाथरस में बागला जिला अस्पताल के बाह्य रोग विभाग (ओपीडी) में 8 जनवरी को शार्ट सर्किट से मुख्य विद्युत पैनल बॉक्स में आग लग गई। आग से उठते धुंए और विद्युत बॉक्स में हुई धमाके की आवाज से मरीज सहम गए और यहां भगदड़ मच गई। चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टॉफ भी अपने कक्षों को छोड़कर भाग खड़े हुए।
आग की सूचना पर चिकित्साधीक्षक डाक्टर सूर्य प्रकाश और थाना हाथरस गेट प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र राघव पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए। करीब 15 मिनट के प्रयास के बाद विद्युत लाइन को बंद कर आग पर काबू पाया गया, लेकिन करीब दो घंटे तक ओपीडी परिसर में धुआं भरा रहा।
ओपीडी में कक्ष संख्या चार के बाहर लगे मुख्य विद्युत पैनल बॉक्स में सोमवार करीब 11ः30 बजे अचानक शॉर्ट सर्किट से पहले तेज आवाज हुई और उसके बाद आग लग गई। चारों ओर धुआं ही धुआं हो गया। जिस समय यह घटना हुई, उस समय करीब 350 मरीज ओपीडी परिसर में मौजूद थे।गनीमत रही कि इस दौरान कोई हताहत नहीं हुआ। विद्युत बाक्स में आग लगने से पूरे अस्पताल की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई। अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब गया। चिकित्सीय उपकरण भी बंद हो गए। विद्युत लाइन को बंद कर आग पर काबू पाया गया। दोपहर करीब दो बजे तक ओपीडी ठप रही। मरीज उपचार के लिए काफी देर तक अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकते रहे। तमाम मरीज बिना उपचार कराए घर वापस लौट गए।
ओपीडी में हर तरफ धुआं, मरीजों की फूलने लगी सांस
विद्युत बाक्स में आग लगने के बाद ओपीडी में हर तरफ धुंआ ही धुंआ हो गया। इससे मरीज सहम गए। धुंए से मरीजों का दम घुटने लगा। मरीज अपनी जान बचाकर ओपीडी से बाहर भागे। गनीमत रही कि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई है। मरीजों ने धुएं से बचने के लिए मुहं पर कपड़ा रख लिया। अस्पताल में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। आग लगने पर लोग इधर-उधर भागने लगे।
आग से बचाव की व्यवस्था नहीं आई काम, नहीं बजे अलार्म
जिला अस्पताल में आग लगने की स्थिति में काबू पाने के लिए 1.84 करोड़ रुपये अग्नि सुरक्षा उपकरण लगाए गए थे। पिछले दिनों इसे चलाकर भी देखा गया था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उस समय इसमें कोई खास खामी कमी नहीं पाई गई थी। सोमवार को आग लगने से इसकी कलई खुल गई। ओपीडी में आग लगने के बावजूद अलार्म तक नहीं बजा।
मुख्य विद्युत पैनल में शॉर्ट सर्किट से आग लगने से ओपीडी में काफी धुंआ हो गया। पैनल की वायरिंग क्षतिग्रस्त हो गई। इसमें किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है और न ही औषधियों को कोई नुकसान पहुंचा है। सुरक्षा की दृष्टि से ओपीडी में आए रोगियों को बाहर कर दिया गया। इसके बाद ओपीडी शुरू की गई। -सूर्य प्रकाश, सीएमएस।