तहसील सदर के अमीन धर्मेंद्र सिंह द्वारा सरकारी धन के गबन का खुलासा होने के बाद अब प्रशासन ने तहसीलों के जरिये राजस्व वसूली की व्यवस्था में बड़े बदलाव का निर्णय लिया है। अब बकायेदारों से हुई वसूली और एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) के तहत निपटाए गए मामलों की फाइलें दोबारा खुलेंगी।
डीएम अतुल वत्स ने तहसीलदारों को निर्देश दिए हैं कि वे डेटा एकत्रित कर स्वयं मौके पर जाएं और सत्यापन करें। बकायेदारों से वसूली गई राशि सरकारी खजाने में समय पर जमा हुई है या नहीं। ओटीएस के तहत दी गई छूट नियमों के दायरे में थी या नहीं, अमीनों और राजस्व कर्मियों द्वारा वसूली गई रसीदों का मिलान बैंक और कोषागार के रिकॉर्ड से किया जाए।
उल्लेखनीय है कि तहसील सदर के अमीन धर्मेंद्र सिंह पर सरकारी धन के गबन के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। इस घटना ने तहसील के वसूली कर्मियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए थे।
इसी को आधार बनाकर अब पूरी जिले की तहसीलों में पिछले कुछ महीनों के रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी गई है। डीएम अतुल वत्स का कहना है कि वसूली में किसी तरह का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निस्तारित किए गए मामलों की गहन जांच कराई जा रही है।
भ्रष्टाचार रोकने के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा
डीएम ने तहसील प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में बदलाव किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि अब से कोई भी अमीन जब वसूली करेगा, तो उसे जीपीएस आधारित टाइम स्टैम्प फोटो लेना होगा। वसूली गई धनराशि का तुरंत रसीद और विवरण कार्यालय के रिकॉर्ड में सुरक्षित करना अनिवार्य होगा।