नगर पालिका परिषद परिसर में बुधवार को कूड़े के ढेर में मिलीं पांच एफडीआर ने सरकारी सिस्टम की मनमानी को उजागर किया है। टेंडर के साथ लगाई जाने वालीं जो एफडीआर काम पूरा होने के बाद अवमुक्त कर दी जातीं हैं, वे परिसर में पड़ीं थीं, इसलिए इनके फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार जिन टेंडरों ये एफडीआर लगी हुईं थीं, उनकी फाइलें 24 घंटे बाद भी पालिका कर्मियों को नहीं मिली हैं। इन टेंडर फाइलों को भी गायब करने की आशंका जताई जा रही है। इन पांच एफडीआर में 1,18,500 रुपये की तीन तथा 40-40 हजार रुपये की दो थीं। ये बड़ौदा राजस्थान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक धौलपुर शाखा से वर्ष 2023 में जारी हुई हैं।
सभी अलग-अलग फर्माें की हैं। वर्ष 2023 में नगर पालिका ने जेम पोर्टल पर चार मिनी ट्रक खरीदने के लिए टेंडर निकाला था। इसमें तीन फर्म पास हुईं थीं। पांच में से तीन एफडीआर इन्हीं फर्मों की बताई जा रही हैं। टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हुए भी दो साल हो चुके हैं तथा उसका भुगतान भी हो गया है। टेंडर पूर्ण होने के बाद ठेकेदार को बंधक एफडीआर अवमुक्त कर दी जाती हैं, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ।
एफडीआर फर्जी होने की आशंका
पालिका कर्मी इनसे संबंधित फाइलें तलाश रहे हैं। ईओ भी कह चुके हैं कि प्रकरण वर्ष 2023 का है तथा संबंधित टेंडरों की फाइलें पूर्ण हैं। अब सवाल ये है कि यदि टेंडर की फाइलें पूर्ण हैं तो फिर एफडीआर अवमुक्त क्यों नहीं हुईं। एफडीआर टेंडर फाइलों से निकलकर कूड़े के ढेर तक कैसे पहुंच गईं। इन सवालों ने एफडीआर के फर्जी होने की आशंका को बल दे दिया है। आखिर कोई भी ठेकेदार एफडीआर को यूं ही लावारिस क्यों छोड़ देगा।
फाइलें लापता होने की चर्चाएं
वर्ष 2023 के टेंडर से संबंधित फाइलों की तलाश कराई जा रही है, लेकिन बृहस्पतिवार दोपहर बाद तक इनका पता नहीं चल सका था। इसलिए पालिका में फाइलें गायब करने की भी चर्चा है। हालांकि अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं। बता दें कि पिछले वर्ष डीएम की जांच में टेंडरों में फर्जी एफडीआर लगाने का प्रकरण सामने आ चुका है।
एफडीआर के संबंध में फाइलें दिखवाई जा रही हैं, ताकि पता चल सके कि वे कूड़े के ढेर तक कैसे पहुंचीं। फाइलें देखकर ही पता चलेगा कि यह एफडीआर अवमुक्त हुईं हैं या नहीं। विस्तृत जांच की जा रही है।
-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका।