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हिंदू मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक है मेला

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सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है मेला श्रीदाऊजी महाराज
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एक तरफ दाऊ बाबा-रेवती मइया का मंदिर, दूसरे छोर पर काले खां की मजार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। हाथरस के किला क्षेत्र में लगने वाला श्रीदाऊजी महाराज का सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है। एक तरफ दाऊ बाबा और रेवती मइया का मंदिर है तो दूसरे छोर पर काले खां की मजार है। मेला श्रीदाऊजी महाराज का प्रमुख आकर्षण विराट कुश्ती दंगल है। इसमें कई नामी पहलवान शिरकत करेंगे।
श्रीदाऊजी महाराज मंदिर का निर्माण यहां के राजा दयाराम ने कराया था। यह मेला 1912 में तत्कालीन तहसीलदार श्यामलाल ने लगवाया था। कहा जाता है कि श्याम लाल का बेटा बीमार हो गया था। उन्हें सपना आया कि वो दाऊजी महाराज की पूजा-अर्चना के साथ किला क्षेत्र मेें मेले का आयोजन कराएं। ऐसा करने से उनका बेटा स्वस्थ हो जाएगा। तभी से यहां प्रतिवर्ष इस मेले का आयोजन होता है। अब यह मेला श्रीदाऊजी महोत्सव के रूप में तब्दील हो चुका है। यह मेला लगभग 20 दिन तक चलता है, जिसमें हर फन के कई बड़े-बड़े कलाकार प्रतिभाग करते हैं।
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ध्वजारोहण के साथ मजार में चढ़ाई जाती है चादर
मेला श्रीदाऊजी महाराज को लक्खी मेला के नाम से जाना जाता है। श्रीदाऊजी महाराज मंदिर पर धर्म पताका फहराने के साथ काले खां की मजार पर चादर चढ़ाई जाती है। यहां तक कि मंदिर के साथ मजार पर पुताई व साफ-सफाई होती है। दाऊजी मंदिर में पूजा-अर्चना करने और चादर चढ़ाने के बाद देवछठ को विधिवत मेले का उद्घाटन होगा। इस मेला परिसर में एक छोर पर दाऊजी महाराज का मंदिर है तो दूसरी ओर काले खां की मजार है। सभी धर्मों के लोग मंदिर में दर्शन करतेे हैं तो मजार पर मत्था भी जरूर टेकते हैं।
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मंदिर की गुुंबद में आज भी हैं गोलों के निशां
लोगों की मानें तो अंग्रेजों ने दाऊजी महाराज मंदिर पर वर्ष 1817 में तोप से गोले दागे थे, लेकिन इस मंदिर का कुछ नहीं बिगाड़ सके। मंदिर की गुंबद पर दागे गए तोप के गोलों के निशान आज भी मौजूद हैं। मंदिर में एक गोला सुरक्षित भी रखा हुआ है। तीन गोले अभी भी मंदिर की गुंबद में फंसे हुए हैं।
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