फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हादसे का अनसुना सच: हजारों लोगों का कार्यक्रम और बाबा ने दिए केवल 45 मिनट, क्या यह लोगों की जान से खेलना नहीं?

Wed, 03 Jul 2024 09:23 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

घटना स्थल पर मौजूद चश्मदीद विजय ने कहा कि प्रशासन सिर्फ लीपापोती कर रहा है। बाबा पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। सिर्फ आयोजकों पर कार्रवाई की जा रही है।
विज्ञापन
Hathras Accident - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाथरस के सिकंदराराऊ के फुलरई मुगलगढ़ी में मंगलवार को साकार विश्वहरि भोले बाबा के सत्संग के बाद मची भगदड़ से मौतों के मामले में मुख्य सेवादार व सहयोगियों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। बुधवार दोपहर तक इस हादसे में मृतक संख्या 116 से बढ़कर 121 पहुंच गई है। अमर उजाला ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थानीय लोगों और चश्मदीदों से बात की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। साथ ही लोगों ने कुछ सवाल उठाए हैं, जिनके जवाब मिलने अभी बाकी हैं।

विज्ञापन




Trending Videos

हाथरस हादसे के चश्मदीद आकाश ने बातचीत के दौरान कहा कि जो आयोजक हैं और कर्मचारी हैं उनके खिलाफ एफआईआर हुई है तो बाबा के ऊपर भी एफआईआर होनी चाहिए। बाबा के ऊपर क्यों कार्रवाई नहीं हो रही? इसके पीछे क्या वजह है? आकाश ने आगे कहा कि बाबा को कार्यक्रम में कम से कम दो-चार घंटे का समय देना चाहिए था। जिससे लोग आते-जाते रहते तो लोगों की इतनी भीड़ नहीं जुटती। बाबा 45 मिनट से लेकर एक घंटे का समय लेकर आए थे। इतने कम समय में आकर वह चले भी गए। ऐसे में भीड़ प्रबंधन कैसे हो पाता।

बाबा पर क्यों नहीं हुई एफआईआर
घटना स्थल पर मौजूद चश्मदीद विजय ने कहा कि प्रशासन सिर्फ लीपापोती कर रहा है। बाबा पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। इस घटना के पीछे जितने भी अधिकारी जिम्मेदार हैं, उनके ऊपर भी कार्रवाई होनी चाहिए। चश्मदीद आकाश ने कहा कि बाबा के आयोजकों पर कार्रवाई हो रही है। लेकिन बाबा पर नहीं। कमेटी का नाम एफआईआर में है। 

काफिले को निकालने के चक्कर में दांव पर लगा दी लोगों की जानें
सत्संग में स्वयंसेवकों और पिंक आर्मी ने भोले बाबा के वाहनों के काफिले को निकालने के लिए भीड़ रोक दी। स्वयंसेवकों के लाठी-डंडों से भीड़ को धकियाकर रोकने और बाबा के काफिले की चरण धूल लेने की होड़ के बीच कुछ महिलाएं गिर पड़ीं।
विज्ञापन

पुलिस व प्रत्यक्षदर्शी सेवादारों और सुरक्षागार्डों को मान रहे जिम्मेदार
यह बात तो साफ है कि पुलिस व प्रत्यक्षदर्शी 2 जुलाई से ही घटना के लिए लाठी-डंडे वाले सेवादारों व सुरक्षागार्डों को जिम्मेदार मान रहे हैं। अगर वे रोकटोक न करते, धक्का मुक्की न करते तो शायद इतनी बड़ी घटना न होती। इसके बाद फिर घटना को दबाने की कोशिश की। अगर आसपास के ग्रामीण न आते और पुलिस प्रशासन को न बुलाते तो बहुत देर होती। मृतक संख्या और अधिक होती। पुलिस व ग्रामीणों के आते ही यह डंडेधारी सेवादार व विशेष वर्दीधारी कमांडो व सुरक्षाकर्मी गायब हो गए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें