जनता दर्शन में आई एक शिकायत पर त्वरित करवाई करते हुए डीएम अतुल वत्स ने सरकारी धन के गबन का पर्दाफाश किया है। पीड़ित गांव बघना के किसान राधे सिसोदिया के साथ डीएम खुद तहसील सदर के संग्रह कार्यालय पहुंच गए।
जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता से कुल 2.65 लाख रुपये वसूले गए, लेकिन अमीन में एक मुश्त समाधान योजना के तहत 1.50 लाख रुपये में ऋण को समाप्त करा दिया था, जिसकी रसीद किसान को नहीं दी गई। इस तरह से 1.15 लाख रुपये का गबन किया गया।
डीएम के आदेश पर एसडीएम राजबहादुर सिंह ने प्रथम दृष्टया जांच के आधार पर संग्रह अमीन धर्मेंद्र सिंह निलंबित कर दिया है। नायब तहसीलदार को पूरे प्रकरण की जांच सौंप दी गई है। प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। प्राथमिक जांच के दौरान बैंक में जमा धनराशि और अमीन के पास दर्ज रिकॉर्ड में बड़ा अंतर मिला है।
गांव बघना निवासी राधे सिसोदिया की शिकायत पर हुई जांच में सामने आया कि उनके पिता दिवंगत किसान रामखिलाड़ी के खिलाफ तहसील सदर से 2.40 लाख रुपये की आरसी जारी हुई थी। अमीन ने इसके एवज में कुल 2.65 लाख रुपये वसूले।
पहली किस्त में 50 हजार और दूसरी किस्त में 2.15 लाख रुपये वसूले गए। इसके बाद अमीन ने एकमुश्त समाधान योजना के तहत 1.50 लाख रुपये में ऋण को समाप्त करा दिया था, लेकिन शिकायतकर्ता को कोई भी सरकारी रसीद नहीं दी गई।
इस तरह से 1.15 लाख रुपये का गबन किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि रुपये देने के बावजूद कागजों में उनकी देनदारी बनी हुई है।डीएम अतुल वत्स तहसील सदर के संग्रह कार्यालय पहुंचे। वहां न केवल अभिलेख अव्यवस्थित मिले, बल्कि संबंधित अमीन का बस्ता भी कार्यालय में मौजूद नहीं था।
डीएम के निर्देश पर अमीन का बस्ता घर से मंगवाया गया। जब आरसी पंजिका, रसीद बही और मास्टर पंजिका का मिलान किया गया, तो चौंकाने वाली अनियमितता सामने आई। डीएम ने तत्काल अमीन धर्मेंद्र का बस्ता तहसील में ही जमा करा दिया।
50 हजार वसूले, बैंक में जमा किए 30 हजार
जांच में प्रथम दृष्टया पाया गया कि शिकायतकर्ता ने अमीन को जो धनराशि दी थी, उसकी तुलना में बैंक में कम रुपया जमा किया गया। 50 हजार रुपये की वसूली के सापेक्ष बैंक में केवल 30 हजार रुपये ही जमा मिले। अमीन ने भी स्वीकार किया कि उसने मौके पर वसूली की सरकारी रसीद नहीं दी थी। जब पत्रावलियों और संग्रह रजिस्टर की जांच की गई, तो पाया गया कि अमीन धर्मेंद्र ने 1.15 लाख के करीब सरकारी खाते में दर्ज नहीं किए। अमीन ने प्राप्त धनराशि को छिपाया और कार्यालय में उसका सही अंकन नहीं कराया।
पूरी वसूली कर ओटीएस से करते कमाई
इस प्रकरण ने ऋण की वसूली में पर्दे के पीछे चल रहे खेल को उजागर कर दिया है। जांच में स्पष्ट हुआ है कि अमीनों द्वारा जिन लोगों से वसूली की जाती है, उनको सरकारी रसीद नहीं दी जाती है। वसूली गई धनराशि को अमीन अपने पास रख लेते हैं। इसके बाद एक मुश्त समाधान योजना लागू होने के दौरान कम धनराशि जमा कर ऋण वसूली लक्ष्य को पूरा करा दिया जाता है, जिससे अमीन कमाई करते हैं।
दो सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने प्रभारी अधिकारी कलेक्ट्रेट धर्मेंद्र सिंह और उप जिलाधिकारी सदर राज बहादुर सिंह को जांच अधिकारी नामित किया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि वसूली की कैश बुक और अन्य अभिलेखों की गहनता से जांच कर तत्काल रिपोर्ट दी जाए।
अमीन द्वारा सरकारी धन के गबन की पुष्टि हुई है। इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। संबंधित दोषी अमीन के खिलाफ सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। सरकारी धन के साथ हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तहसीलदार को भी निर्देशित किया कि नियमित रूप से अमीनों की वसूली और अभिलेखों की समीक्षा की जाए।
अतुल वत्स, डीएम।